एआई के गुलाम नहीं, मास्टर बनें पत्रकार, नहीं तो होगा पेशेवर विस्थापन
-दून यूनिवर्सिटी में विशेष व्याख्यान, स्किल गैप को बताया सबसे बड़ा खतरा
देहरादून। दून यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन स्टडीज़ में आयोजित “एआई के जमाने में न्यूज और जर्नलिज्म का भविष्य” विषय पर विशेष व्याख्यान में वरिष्ठ पत्रकार राजेश महापात्रा ने मीडिया पेशेवरों को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि पत्रकारों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के मास्टर बनना होगा, उसका गुलाम नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो पत्रकार समय रहते अपने कौशल अपडेट नहीं करेंगे, उनके सामने पेशेवर विस्थापन का गंभीर खतरा खड़ा हो सकता है।
महापात्रा ने कहा कि एआई अब न्यूजरूम का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और प्रोडक्शन व डेस्क से जुड़े पत्रकारों को नई तकनीक के अनुरूप खुद को ढालना होगा। उन्होंने कहा कि एआई डेटा-आधारित रिपोर्टिंग और कंटेंट प्रोडक्शन में उपयोगी साबित हो रहा है, लेकिन खोजी पत्रकारिता, विश्वसनीय स्रोतों का निर्माण और नैतिक निर्णय जैसे महत्वपूर्ण कार्य केवल मानवीय संवेदनशीलता और विवेक से ही संभव हैं।
इस अवसर पर स्कूल के डीन प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि मीडिया क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तकनीकी बदलाव के बीच ‘स्किल गैप’ सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों और छात्रों को लगातार सीखते रहना होगा, ताकि वे बदलते दौर में प्रासंगिक बने रहें।
प्रो. हर्ष डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि मजबूत बौद्धिक आधार और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों की समझ के बिना एआई का प्रभावी उपयोग संभव नहीं है। उन्होंने छात्रों को तकनीक को सहायक उपकरण के रूप में अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम का संचालन शिवानी खत्री ने किया। इस मौके पर डॉ. करुणा शर्मा, जूही प्रसाद, डॉ. वंदना नौटियाल और पियाशी हिमानी सहित अनेक छात्र-छात्राएं एवं संकाय सदस्य मौजूद रहे।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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