खीर गंगा फ्लैश फ्लड का खुलासा: 1,700 मीटर नीचे गिरा भारी मलबा बना तबाही की तेज धारा
–क्लाउडबर्स्ट और ग्लेशियल झील फटने की आशंका खारिज, वीडियो में दिखा अचानक मलबे की लहर आने का पैटर्न
देहरादून। धराली खीर गंगा क्षेत्र में आई फ्लैश फ्लड को लेकर सामने आई रिपोर्ट में इसके कारणों को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1,700 मीटर नीचे खीर गंगा चैनल की ओर बड़े पैमाने पर मलबा गिरा। इस मलबे ने चैनल में प्रवेश करते ही तेज रफ्तार और मलबे से भरी धारा का रूप ले लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक 3 से 5 अगस्त के बीच क्षेत्र में बारिश हल्की से मध्यम थी। ऐसे में क्लाउडबर्स्ट यानी बादल फटने की संभावना नहीं थी। वहीं ऊपरी कैचमेंट में कोई ग्लेशियल लेक भी मौजूद नहीं थी, जिससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की संभावना भी नहीं रही।
स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में पहले अचानक तेज रफ्तार से मलबे से भरी लहर आती दिखाई दी, जबकि इसके बाद लंबे समय तक अपेक्षाकृत कम तीव्रता का बहाव जारी रहा। रिपोर्ट के अनुसार यह पैटर्न सामान्य मानसूनी बाढ़ के बजाय मास-रिलीज इवेंट से मेल खाता है। इसी घटनाक्रम को फ्लैश फ्लड के प्रमुख कारण के तौर पर सामने रखा गया है।
रिपोर्ट ने आइस-पैच और ग्लेशियर के बीच भी अंतर स्पष्ट किया है। इसमें कहा गया है कि आइस-पैच को ग्लेशियर नहीं माना जा सकता। आइस-पैच बर्फ, फर्न और बर्फीली परतों का स्थिर द्रव्यमान होता है, जबकि ग्लेशियर बर्फ का ऐसा द्रव्यमान है जो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में धीरे-धीरे प्रवाहित होता है।
इस तरह उपलब्ध तथ्यों के आधार पर खीर गंगा में आई अचानक बाढ़ के पीछे अचानक बड़े पैमाने पर मलबे के रिलीज और उसके तेज बहाव में बदलने की घटना को प्रमुख कारण माना गया है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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