उत्तराखंड : 95 साल की मां की आंखों के सामने उजड़ गया जीवनभर का सहारा -बेटी की हत्या से पहाड़ का आंगन हुआ सूना

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अल्मोड़ा। बसई (रतखेत) गांव। वह बेहद सरल और धार्मिक स्वभाव की महिला थीं। अपना अधिकांश समय पूजा-पाठ और मंदिरों में बिताती थीं। उम्र के इस पड़ाव पर, जब 95 साल की मां धनुली देवी को अपनी अंतिम यात्रा तक बच्चों के सहारे और उनकी सेवा की उम्मीद थी, नियति ने उनके सामने ऐसा दर्द रख दिया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जिस बेटी को उन्होंने अपनी गोद में पाला-बढ़ाया, उसी बेटी की अर्थी को अपनी आंखों के सामने उठते देखना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन गया।

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यह महज हत्या की एक वारदात नहीं, बल्कि उस बूढ़ी मां के जीवन पर टूटा ऐसा पहाड़ है, जिसका दर्द शायद वह जिंदगी भर अपने सीने में लिए रहेंगी। जिस बेटी ने चार दशकों तक परछाई की तरह अपनी मां का साथ निभाया, सुख-दुख में उनका सहारा बनी और हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर खड़ी रही, आज वही बेटी लहूलुहान हालत में मां की आंखों के सामने दम तोड़ गई।

शनिवार की वह मनहूस सुबह बसई (रतखेत) गांव के लिए आम दिनों की तरह ही शुरू हुई थी। गांव में दिनचर्या धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही थी। घर के आंगन में पूजा-पाठ चल रहा था। तुलसी देवी अपनी रोज की दिनचर्या के अनुसार धूप-दीप जलाकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना कर रही थीं। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों बाद उनके आंगन में ऐसा कहर टूटने वाला है, जो उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा।

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पूजा-पाठ में लीन परिवार को क्या पता था कि अगले कुछ क्षणों में घर का आंगन चीख-पुकार से भर जाएगा। देखते ही देखते खुशियों और उम्मीदों से भरा यह घर मातम में बदल गया। 95 वर्षीय धनुली देवी के सामने उनकी बेटी की जिंदगी छिन गई और वह बेबस होकर सब कुछ देखती रह गईं।

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जिस बेटी के सहारे उन्होंने जीवन के अंतिम पड़ाव की कल्पना की होगी, आज उसी बेटी की तस्वीर और उसकी यादें उनके पास रह गई हैं। पहाड़ के इस शांत गांव में हुई इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को भीतर तक तोड़ दिया, बल्कि उस मां के जीवन से उसका सबसे बड़ा सहारा भी हमेशा के लिए छीन लिया।

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