चारधाम में आस्था की सीमा तय : बद्रीनाथ-केदारनाथ व गंगोत्री में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर ताला -यमुनोत्री पर सस्पेंस बरकरार

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देहरादून, 26 जनवरी। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को लेकर बड़ा और विवादास्पद फैसला सामने आया है। बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री धाम में अब गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। हालांकि चार धामों में शामिल यमुनोत्री मंदिर समिति ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया है।


बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इस विषय पर आम सहमति बना ली है और जल्द ही बोर्ड बैठक में इस पर औपचारिक मुहर लगाई जाएगी। वहीं गंगोत्री मंदिर समिति पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का निर्णय ले चुकी है।


बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि इस फैसले पर साधु-संतों, तीर्थ पुरोहितों, स्थानीय निवासियों और अन्य सभी हितधारकों से सहमति बन चुकी है।
उन्होंने कहा, “इस सप्ताह के अंत में होने वाली बोर्ड बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जाएगी, जिसके बाद यह नियम बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में लागू हो जाएगा।”

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द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था नई नहीं है बल्कि आदि शंकराचार्य के काल से चली आ रही परंपरा का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा, “बद्रीनाथ और केदारनाथ पर्यटन स्थल नहीं बल्कि वैदिक आस्था के केंद्र हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 हमें अपने धार्मिक स्थलों के प्रबंधन का अधिकार देता है।”

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हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि सनातन धर्म में आस्था रखने वाले सभी लोगों का मंदिरों में स्वागत है। सिख और जैन श्रद्धालुओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मुद्दा धर्म का नहीं बल्कि उस व्यक्ति की आस्था का है।
उधर, गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि मां गंगा के मंदिर में किसी भी गैर-हिंदू को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।


उन्होंने कहा, “गंगोत्री धाम गैर-हिंदुओं के लिए पूर्णतः वर्जित रहेगा।” इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा का संचालन मंदिर समितियों के अधिकार क्षेत्र में आता है और सरकार की भूमिका केवल सहयोग की है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों की बात सुनी जाएगी।

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गौरतलब है कि हाल ही में हरिद्वार में हर की पौड़ी और आसपास के घाटों का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी अर्धकुंभ से पहले कुंभ क्षेत्र के सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थलों को ‘अहिंदू निषेध क्षेत्र’ घोषित करने की मांग की है। इस संबंध में हर की पौड़ी क्षेत्र में बोर्ड भी लगाए जा चुके हैं।



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