नवरात्र में बड़ा हादसा : बदियाकोट का प्राचीन मां भगवती मंदिर आग में जलकर खाक -ऐतिहासिक काष्ठकला नष्ट
बागेश्वर। कपकोट के बदियाकोट स्थित प्राचीन आदि शक्ति मां भगवती मंदिर में भीषण आग लगने से मुख्य मंदिर पूरी तरह जलकर खाक हो गया। हादसे में मंदिर की ऐतिहासिक काष्ठकला और बेशकीमती धरोहर को भारी नुकसान पहुंचा है। मंदिर में स्थापित देवी की प्रतिमा, आभूषण और अन्य कीमती सामान भी जलकर नष्ट होने की सूचना है। नवरात्र के पावन पर्व पर हुई इस घटना से बदियाकोट सहित आसपास के गांवों में शोक की लहर है।
शुक्रवार सुबह आग की लपटों से घिरे मंदिर का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद घटना की जानकारी दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंची। मंदिर में आग लगने की खबर से मां भगवती के श्रद्धालु स्तब्ध रह गए। क्षेत्र के लोगों ने इस घटना को धार्मिक आस्था के साथ ही सांस्कृतिक विरासत के लिए भी बड़ी क्षति बताया है।
अनूठी काष्ठकला और ऐतिहासिक धरोहर को भारी नुकसान
मां भगवती का प्राचीन मंदिर क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र था। मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य शैली और पारंपरिक काष्ठकला के लिए प्रसिद्ध था। लकड़ी पर की गई बारीक और आकर्षक नक्काशी उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला की अनमोल पहचान थी। आग में मंदिर के नष्ट होने से क्षेत्र की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंचने की आशंका है।
मौके पर पहुंचीं बचाव टीमें, आग के कारणों की जांच
घटना की सूचना मिलने पर ग्रामीणों के साथ अग्निशमन विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। हालांकि, टीमों के पहुंचने तक मंदिर पूरी तरह जल चुका था। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। स्थानीय स्तर पर नवरात्र के दौरान मंदिर में दीपक जलाने और विद्युत शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। प्रशासन और अग्निशमन विभाग की टीमें मामले की जांच में जुटी हैं।
मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग
घटना पर मंदिर के मुख्य पुजारी मंगल सिंह धामी, देव सिंह धामी, पुष्कर सिंह, बलवंत सिंह, मंदिर समिति के अध्यक्ष भरत पाल सिंह दानू, ग्राम प्रधान बोरबलड़ा पूजा दानू, ग्राम प्रधान कालों राजेंद्र दानू, क्षेत्र पंचायत सदस्य खिलाफ सिंह दानू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव, ऊर्जा समिति बोरबलड़ा के अध्यक्ष राम सिंह दानू और राजू दानू सहित बदियाकोट, बोरबलड़ा एवं कालों के ग्रामीणों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से आग लगने के कारणों की निष्पक्ष जांच कराने और मंदिर के पुनर्निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए जल्द आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि मंदिर क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक था। ऐसे में इसके पुनर्निर्माण के लिए प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर पहल करनी चाहिए, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को फिर से संरक्षित किया जा सके।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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