सच दिखाया तो मुकदमा! खटीमा में पत्रकार दीपक पर केस से भड़का मीडिया जगत -NUJ उत्तराखंड ने दी आंदोलन की चेतावनी

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खटीमा/देहरादून। उत्तराखंड में जमीनी हकीकत दिखाना अब पत्रकारों के लिए भारी पड़ता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र खटीमा में गैस संकट की खबर दिखाने वाले वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा के खिलाफ पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद प्रदेशभर के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया जा रहा है।


गैस संकट की ग्राउंड रिपोर्ट दिखाना पड़ा महंगा
बीते बुधवार को खटीमा के चकरपुर क्षेत्र में रसोई गैस के लिए उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लगी थीं। लोग सुबह से ही सिलेंडर के इंतजार में परेशान थे। इस जनसमस्या को वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रमुखता से उठाया और मौके की वास्तविक स्थिति को सामने रखा।

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लेकिन जनता की परेशानी को उजागर करना कुछ लोगों को नागवार गुजर गया। आरोप है कि भाजपा मंडल महामंत्री कमलदीप सिंह राणा ने इसे सरकार की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर दे दी।


बिना जांच दर्ज हुआ मुकदमा, उठे सवाल
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि आम मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लोगों को थानों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन इस मामले में पुलिस ने बिना प्रारंभिक जांच के ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(1)(B) के तहत आनन-फानन में मुकदमा दर्ज कर लिया। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

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पत्रकारों का सवाल – क्या अब सच दिखाना भी अपराध है?
घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों ने तीखा सवाल उठाया है कि यदि पत्रकार जमीनी हकीकत नहीं दिखाएंगे तो जनता की समस्याएं सामने कैसे आएंगी और लोकतंत्र कैसे मजबूत होगा।


NUJ उत्तराखंड ने दी आंदोलन की चेतावनी
घटना पर नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (NUJ उत्तराखंड) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने इसे पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि जन सरोकारों की खबरों को रोकने के लिए मुकदमों का सहारा लिया जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पत्रकारों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।

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प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल
खटीमा की यह घटना उत्तराखंड में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि अगर सच्चाई दिखाने पर इस तरह मुकदमे दर्ज किए जाते रहे, तो भविष्य में पत्रकारों के लिए जनता की आवाज उठाना कठिन हो जाएगा।

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