हरेले के पर्व पर नैनी में पौधरोपण, धूमधाम से मनाया हरेला

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जगदीश चंद्र भट्ट

नैनी/जागेश्वर। सावन मास में मनाया जाने वाला हरेला सामाजिक रुप से आपना विशेष महत्व रखता है। समूचे कुमाऊं में अति महत्वपूर्ण त्योहारों में से हरेले को एक माना जाता है। सावन लगने से 9 दिन पहले आषाढ़ में हरेला बोने के लिए किसी थाली नुमा पात्र या टोकरी का चयन किया जाता है। इसमें मिट्टी डालकर गेहूं, धान, सरसों आदि 5 या 7 प्रकार के अनाजों को बोया जाता है। 9 दिनों तक इस पात्र में रोज सुबह पानी का छिड़काव करते रहते है। 10वे दिन इसे काटा जाता है। 4 से 6 इंच लंबे इन पौधों को ही हरेला कहा जाता है ।

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घर के सदस्य इसे बहुत आदर के साथ अपने सिर पर रखते हैं। हरेला जितना बड़ा होगा उतनी फसल बढ़िया होगी। यह मान्यता है। आज जागेश्वर धाम सहित सभी जगह हरेला का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान क्षेत्र में कई जगह वृक्षारोपण भी किया गया। मल्ली नैनी में देवदार ,बाज, और फलदार पेड़ पर फूल के पौध का रोपण किया गया। इस दौरान माया भट्ट , रमेश चंद्र भट्ट, महिमन भट्ट, राजू भट्ट, पूरन भट्ट, दीपक भट्ट, ग्राम प्रधान खष्टी पांडे, नवीन भट्ट, मोहन भट्ट आदि मौजूद थे।

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