अंगदान से बनेगा जीवन का सहारा -दून मेडिकल कॉलेज में बोन बैंक के बाद स्किन बैंक की तैयारी
देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शुक्रवार को अंगदान को लेकर एक भावनात्मक और प्रेरक माहौल देखने को मिला। अस्पताल परिसर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक के माध्यम से एमबीबीएस छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों को यह संदेश दिया गया कि एक सही फैसला कई परिवारों के जीवन में खुशियों का उजाला ला सकता है।
कार्यक्रम में बताया गया कि दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बोन बैंक की स्थापना हो चुकी है, जबकि स्किन बैंक (त्वचा बैंक) की शुरुआत शीघ्र की जाएगी। यह पहल राज्य में जले हुए (बर्न) मरीजों और गंभीर दुर्घटना पीड़ितों के इलाज में मील का पत्थर साबित होगी।
यह जागरूकता कार्यक्रम स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो) उत्तराखंड, मोहन फाउंडेशन और लिफ्टअप्रोमीडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। लिफ्टअप्रोमीडिया के नुक्कड़ नाटक कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया।
नाटक के माध्यम से बताया गया कि एक ब्रेन डेड अंगदाता अपने हृदय, लीवर, किडनी समेत अंगों से आठ गंभीर मरीजों को नया जीवन दे सकता है, जबकि नेत्रदान से दो नेत्रहीनों की दुनिया रोशन हो सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि मस्तिष्क मृत्यु (ब्रेन डेथ) के बाद अंगदान पूरी तरह कानूनी और नैतिक प्रक्रिया है।
इस अवसर पर सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दून मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट सेवाओं को और मजबूत करने पर तेजी से काम किया जा रहा है। बोन बैंक के बाद स्किन बैंक शुरू होने से राज्य को बड़ी स्वास्थ्य सुविधा मिलने जा रही है।
कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक एवं सोटो के संयुक्त निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने अंगदान की शपथ ली।
इस मौके पर मोहन फाउंडेशन के प्रोजेक्ट लीडर संचित अरोड़ा, अरुण शर्मा, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर मुकेश सिंह सहित बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र उपस्थित रहे।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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