कुमाऊं में यूपी के शातिर चोरों का आतंक -25 सलाखों के पीछे, बंद घरों को बना रहे थे निशाना

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–ऊधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा 84, नैनीताल में 43 वारदातें, पुलिस ने चोरी का 80 फीसदी तक माल किया बरामद

हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में बंद घरों के ताले तोड़कर चोरी करने वाले शातिर चोरों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश के बरेली, रामपुर और मुरादाबाद के रहने वाले 25 से अधिक आरोपियों को पुलिस सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है। चोरों के निशाने पर खासतौर पर यूपी सीमा से सटे तराई-भावर के जिले रहे, जहां बंद मकानों को खंगालकर नकदी, जेवरात और कीमती सामान पर हाथ साफ किया गया। पुलिस का दावा है कि इन वारदातों में चोरी हुए सामान का 80 प्रतिशत तक बरामद किया जा चुका है।

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कुमाऊं के छह जिलों में वर्ष 2026 के दौरान अब तक बंद घरों के ताले तोड़कर चोरी की 136 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें ऊधमसिंह नगर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 84 मामले दर्ज किए गए। नैनीताल जिले में भी चोरों ने 43 घरों को निशाना बनाया। इसके उलट पहाड़ी जिलों में ऐसी वारदातें अपेक्षाकृत कम रहीं। अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चम्पावत में मिलाकर बंद घरों में चोरी की नौ घटनाएं दर्ज हुईं।

रेकी के बाद वारदात, दोपहिया वाहनों से पहुंचते थे चोर

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का चोरी करने का तरीका लगभग एक जैसा था। वे दोपहिया वाहनों से जोड़ों में पहुंचकर पहले बंद मकानों की रेकी करते थे। घर में लोगों की आवाजाही और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद मौका मिलते ही ताले तोड़कर चोरी कर फरार हो जाते थे। लंबे समय से बंद पड़े मकान और ऐसे घर, जिनके मालिक एक सप्ताह या उससे अधिक समय के लिए बाहर जाते थे, उनके प्रमुख निशाने पर रहते थे।

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185 अन्य चोरियां भी दर्ज, यूएस नगर सबसे आगे

बंद घरों में चोरी की घटनाओं के अलावा कुमाऊं के छह जिलों में छोटी-बड़ी चोरी की 185 अन्य वारदातें भी दर्ज की गईं। इनमें जेवरात, नकदी और अन्य सामान चोरी किया गया। इन मामलों में भी ऊधमसिंह नगर सबसे आगे रहा, जहां 124 घटनाएं सामने आईं। नैनीताल में 42, चम्पावत में 10, बागेश्वर में चार, पिथौरागढ़ में तीन और अल्मोड़ा में दो चोरी की घटनाएं दर्ज की गईं।

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तराई-भावर में ज्यादा खतरा, पुलिस की कार्रवाई पर नजर

आंकड़े बताते हैं कि बंद घरों में चोरी की समस्या तराई-भावर के जिलों में अधिक गंभीर बनी हुई है। यूपी के सीमावर्ती इलाकों से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी और चोरी के माल की बरामदगी पुलिस के लिए बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। हालांकि, लगातार सामने आ रही वारदातें घरों की सुरक्षा और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करती हैं।

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