बहुचर्चित तुषार अपहरण कांड अब राज्य मानवाधिकार आयोग के रडार पर

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हल्द्वानी। बहुचर्चित तुषार अपहरण कांड में पुलिस की लापरवाही अब राज्य मानवाधिकार आयोग के रडार पर आ गई है। पीड़ित पक्ष की ओर से न्याय न मिलने पर आयोग से गुहार लगाई गई जिस पर गंभीर रुख अपनाते हुए आयोग ने आईजी कुमाऊं से मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।


गली नंबर एक तल्ली बमोरी निवासी गिरीश चंद्र, जो पीडब्ल्यूडी में संविदा कर्मी हैं, ने शिकायत में बताया कि बीती 6 मई को उनके इंजीनियर बेटे तुषार का दिनदहाड़े कार सवार बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। यह घटना उस समय हुई जब तुषार सुबह करीब साढ़े 10 बजे कालाढूंगी रोड स्थित ईएनटी हॉस्पिटल के पास टहलने निकले थे। बदमाशों ने तुषार को जबरन उठाकर पीटते हुए उत्तर प्रदेश के बांदा तक पहुंचा दिया। गिरीश की तहरीर पर मुखानी पुलिस ने कपिल तिवारी, आलोक रंजन तिवारी समेत कुछ अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अपहर्ताओं द्वारा 50 लाख रुपये की फिरौती मांगने का आरोप भी सामने आया।

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पुलिस ने इस मामले में 20 मई को दया किशन तिवारी निवासी सिविल लाइन कोतवाली बांदा, अंकुश कुमार एटा और विनय प्रताप एटा को गिरफ्तार किया। हालांकि, घटना के ढाई महीने बीत जाने के बावजूद मुख्य साजिशकर्ता माने जा रहे आलोक तिवारी और कपिल तिवारी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। इस लचर कार्रवाई से परेशान होकर पीड़ित गिरीश चंद्र ने राज्य मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 9 जुलाई को आईजी कुमाऊं के नाम पत्र जारी किया है और सितंबर तक पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट (आख्या) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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