उत्तराखंड -मदरसे में बच्चों की बदहाल जिंदगी का खुलासा, बेसमेंट में ठूंसे मिले मासूम -यौन शोषण शिकायत के बाद आयोग का छापा
देहरादून। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा गुरुवार को एक मदरसे का निरीक्षण किया गया, जहां कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। यह कार्रवाई विभिन्न माध्यमों से मिली शिकायतों और एक प्रतिष्ठित एनजीओ द्वारा दर्ज यौन शोषण संबंधी शिकायत के आधार पर की गई।
निरीक्षण के दौरान आयोग ने पाया कि संस्थान में नक्शा पासिंग और अग्नि सुरक्षा मानकों का अभाव है। बच्चों को बेसमेंट में बने छोटे कमरों में क्षमता से अधिक संख्या में रखा गया था, जिससे उनकी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा था। अधिकांश बच्चे बिहार और अन्य राज्यों से लाए गए पाए गए, जबकि स्थानीय बच्चों की संख्या बेहद कम मिली।
बच्चों ने आयोग को बताया कि उनके माता-पिता जीवित हैं और उन्हें शिक्षा व बेहतर व्यवस्था का भरोसा देकर यहां भेजा गया था। आयोग की सदस्य डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों को किस तरह का वातावरण और शिक्षा दी जा रही है, यह गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों का इस्तेमाल धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता।
डॉ. खन्ना ने राज्य में संचालित सभी प्रकार के हॉस्टलों और आवासीय संस्थानों के लिए सख्त नियमावली बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल हॉस्टलों पर लागू सुरक्षा मानक सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू होने चाहिए और पंजीकरण अनिवार्य किया जाना चाहिए।
एनसीआरबी के हालिया आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े अपराधों में बढ़ोतरी का एक कारण रिपोर्टिंग बढ़ना है, जबकि मोबाइल और सोशल मीडिया का दुष्प्रभाव भी बच्चों को असामाजिक गतिविधियों की ओर धकेल रहा है। उन्होंने समाज में बढ़ती राजनीतिक कटुता, रंजिश, गिरती नैतिकता और टूटते पारिवारिक संबंधों को भी अपराधों की बड़ी वजह बताया।
हाल ही में चंपावत में राजनीतिक रंजिश के चलते नाबालिग बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने की घटना पर उन्होंने गहरी चिंता जताई। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे वीडियो किसी भी हालत में साझा न करें और प्राप्त होने पर तुरंत डिलीट कर दें, ताकि बच्ची की पहचान और सम्मान सुरक्षित रह सके।
आयोग ने कहा कि पूरे मामले में संबंधित विभागों और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की जाएगी और बच्चों की सुरक्षा व अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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