भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में समाहित करने पर मंथन -ग्राफिक एरा भीमताल में तीन दिवसीय वेबिनार शुरू

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भीमताल। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के भीमताल परिसर में भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए तीन दिवसीय वेबिनार का शुभारंभ किया गया। स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एवं कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग ने भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के सहयोग से “पाठ्यक्रम निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेशन : बहुविषयक दृष्टिकोण एवं वैदिक गणित के विशेष संदर्भ में” विषय पर इस वेबिनार का आयोजन किया है।

उद्घाटन सत्र में परिसर निदेशक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत का योगदान केवल शून्य और दशमलव प्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, योग, पारंपरिक कृषि पद्धतियों तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों की समृद्ध विरासत भी विश्व के लिए प्रेरणास्रोत रही है। उन्होंने गुरुकुल प्रणाली की अनुभवात्मक एवं सहयोगात्मक शिक्षण पद्धति को आज की आधुनिक शिक्षा के लिए भी प्रासंगिक बताया।

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मुख्य वक्ता एवं भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के प्रमुख ने भारतीय ज्ञान परंपरा की अवधारणा और उसकी समकालीन उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गणित, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, कृषि, राजनीति, व्यापार, कला और युद्धकला जैसे विविध क्षेत्रों में भारत का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने पाठ्यक्रम में आईकेएस को शामिल करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में अंतर्विषयक सोच, आलोचनात्मक चिंतन और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा।

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दूसरे तकनीकी सत्र में ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन की रणनीतियों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने पंचतंत्र और भारतीय चिंतन परंपरा के उदाहरणों के माध्यम से खगोल विज्ञान, वास्तुकला, चिकित्सा, अर्थशास्त्र, शासन व्यवस्था और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी भारतीय अवधारणाओं को रेखांकित किया। साथ ही विश्वविद्यालयों में आईकेएस के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संस्थागत ढांचे विकसित करने पर जोर दिया।

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कार्यक्रम का संचालन सुश्री दीपाली चौधरी ने किया। वेबिनार के आगामी सत्रों को लेकर प्रतिभागियों में उत्साह बना हुआ है और शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन को लेकर सार्थक चर्चा की उम्मीद जताई जा रही है।

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