आज है घी संक्रांति- क्या है इस त्यौहार की मान्यता अवश्य पढ़ें-
उत्तराखंड में हिंदू कैलेंडर अनुसार संक्रान्ति को लोक पर्व के रूप में मनाने का प्रचलन रहा है। भाद्रपद मास की संक्रान्ति, जिस दिन सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करता है और जिसे सिंह संक्रांति कहते हैं, यहाँ घी-त्यार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी घी का सेवन अवश्य करते हैं और परंपरागत मान्यता है कि जो इस दिन घी नहीं खाता उसे अगले जन्म में घोंघे के रूप में पैदा होना पड़ता है।
घी संक्रांति या घी त्यार के दिन दूध दही, फल सब्जियों के उपहार एक दूसरे को बाटे जाते हैं. इस परम्परा को उत्तराखंड में ओग देने की परम्परा या ओलग परम्परा कहा जाता है. इसीलिए इस त्यौहार को ओलगिया त्यौहार, ओगी त्यार भी कहा जाता है. यह परम्परा चंद राजाओं के समय से चली आ रही है, उस समय भूमिहीनों को और शासन और समाज मे वरिष्ठ लोगों को उपहार दिए जाते थे. इन उपहारों में काठ के बर्तन ( स्थानीय भाषा मे ठेकी कहते हैं ) में दही या दूध और अरबी के पत्ते और मौसमी सब्जी और फल दिये जाते थे.
इस दिन अरबी के पत्तों का मुख्यतः प्रयोग किया जाता है. सर्वोत्तम अरबी के पत्ते और मौसमी फल सब्जियां और फल अपने कुल देवताओं को चढ़ाई जाती है. उसके बाद गाँव के लोगो के पास उपहार लेकर जाते हैं. फिर रिश्तेदारों को दिया जाता है।
ADVERTISEMENTS
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 फ़ास्ट न्यूज़ के WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
👉 फ़ास्ट न्यूज़ के फ़ेसबुक पेज़ को लाइक करें
👉 कृपया नवीनतम समाचारों से अवगत कराएं WhatsApp 9412034119
संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
www.fastnewsuttarakhand.com

उत्तराखंड…ग्राफिक एरा भीमताल के तीन विद्यार्थियों ने रचा इतिहास, अमेजन में ₹47.88 लाख सालाना पैकेज
उत्तराखंड…पांच दिन भारी बारिश का खतरा –उत्तराखंड में रेड अलर्ट, प्रशासन हाई अलर्ट पर
उत्तराखंड…मानसून को लेकर सख्त हुए कुमाऊँ आयुक्त –आपदा परिचालन केंद्र को 24 घंटे अलर्ट मोड में रखने के निर्देश