उत्तराखंड…शस्त्रों के दुरुपयोग पर प्रशासन का बड़ा प्रहार -4 लाइसेंस निरस्त— डीएम बोले– कानून व्यवस्था से नहीं होगा समझौता
नैनीताल। जनपद में शस्त्रों के दुरुपयोग और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए चार शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। वहीं जांच और अभिलेखों के परीक्षण के बाद चार अन्य मामलों में लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई समाप्त कर दी गई। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और शस्त्रों के दुरुपयोग पर प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति आगे भी जारी रहेगी।
जिला प्रशासन के अनुसार काठगोदाम निवासी त्रिभुवन चंद द्वारा अपने लाइसेंसी पिस्टल से सार्वजनिक स्थान पर वाहन में बैठकर फायरिंग करने का मामला सामने आया था। शस्त्र के दुरुपयोग को गंभीर मानते हुए आयुध अधिनियम के तहत उनका शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया गया।
रामनगर में दर्ज एक अन्य मामले में उमेश बेलवाल द्वारा अपने भाई ललित बेलवाल की लाइसेंसी डबल बैरल बंदूक से हमला किए जाने की पुष्टि हुई। प्रशासन ने माना कि लाइसेंसी हथियार की सुरक्षा और नियंत्रण शस्त्र धारक की जिम्मेदारी है। इसी आधार पर ललित बेलवाल का शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया।
इसके अलावा आपराधिक मामलों में नाम आने के कारण इश्तियाक अली और मोहम्मद सलीम के शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त किए गए हैं।
वहीं उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों की समीक्षा के बाद सतीश नैनवाल, निसार सिद्दीकी, शाहनवाज मलिक तथा अदनान नवाब के विरुद्ध चल रही शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि शस्त्र अनुज्ञप्ति एक विशेष वैधानिक अधिकार है, जिसका उपयोग पूरी जिम्मेदारी और कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में भविष्य में भी नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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