uttarakhand-निवेश के नाम पर साढ़े 43 लाख की ठगी -तीन दोषियों को एक-एक साल की सजा

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बागेश्वर। निवेश और बीमा पॉलिसी के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने के छह साल पुराने मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाह्य न्यायालय गरुड़ शिवानी नाहर की अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। अदालत ने सुरेंद्र प्रसाद, रूबी सिन्हा और शशिकांत को एक-एक वर्ष के कठोर कारावास और आठ-आठ हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर तीनों को छह-छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

सहायक लोक अभियोजक गौरव अग्रवाल ने बताया कि जूनियर हाईस्कूल लखनी में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात उमेद राम आर्य को वर्ष 2016-17 में कुछ लोगों ने बीमा एजेंट बनकर फोन किया। आरोपियों ने उन्हें बीमा पॉलिसियों में निवेश के लिए प्रेरित किया और करीब साढ़े सात लाख रुपये पॉलिसियों के नाम पर ले लिए। शिकायतकर्ता को एक वर्ष तक पॉलिसियां नहीं खोलने के लिए कहा गया, लेकिन बाद में उसे इन पॉलिसियों से कोई लाभ नहीं मिला।

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इसके बाद वर्ष 2018-19 में आरोपियों ने आईपीओ में निवेश के नाम पर करीब 36 लाख रुपये और वसूल लिए। शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने उसके बैंक खाते में करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर किए, लेकिन उसी दिन रकम पर स्टॉप पेमेंट लगाकर उसे वापस ले लिया। इससे शिकायतकर्ता को यह धनराशि भी प्राप्त नहीं हो सकी।

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लगातार रकम गंवाने के बाद धोखाधड़ी का एहसास होने पर उमेद राम आर्य ने वर्ष 2020 में कोतवाली बैजनाथ में तहरीर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता के खाते से अभियुक्तों के बैंक खातों में धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर होने की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि अभियुक्त सुरेंद्र प्रसाद का बैंक खाता उसकी पत्नी रूबी सिन्हा के साथ संयुक्त था। इसके आधार पर रूबी सिन्हा को भी मामले में अभियुक्त बनाया गया।

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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने वादी/शिकायतकर्ता, बैंक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों समेत 10 गवाहों के बयान कराए और 32 दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए। छह वर्ष पुराने मामले में अदालत ने अभियोजन के विधिक तर्कों, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद तीनों अभियुक्तों को दोषी माना।

अदालत ने सुरेंद्र प्रसाद, रूबी सिन्हा और शशिकांत को एक-एक वर्ष के कठोर कारावास के साथ आठ-आठ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

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