शादी का वादा टूटने से हर मामला बलात्कार नहीं : हाईकोर्ट -सहमति वाले लंबे संबंध को आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, चार्जशीट रद्द
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से बने संबंधों में यदि बाद में शादी का वादा पूरा नहीं होता, तो मात्र इसी आधार पर उसे बलात्कार नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने कहा कि आईपीसी की धारा 376 के तहत अपराध तभी माना जाएगा जब यह साबित हो कि शादी का वादा शुरू से ही झूठा था और केवल सहमति प्राप्त करने के लिए किया गया था।
मामला क्या था
मसूरी निवासी एक युवती ने सूरज बोरा नामक युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था। युवती के अनुसार, आरोपी ने 45 दिनों के भीतर शादी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में अपने वादे से मुकर गया। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसे आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि दोनों पक्ष वयस्क थे और उनके बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध रहे। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने शुरुआत से ही धोखा देने की मंशा से शादी का वादा किया था। अधिवक्ता ने इसे एक “विफल संबंध” बताते हुए आपराधिक कार्यवाही को कानून का दुरुपयोग बताया।
वहीं राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि युवती की सहमति शादी के आश्वासन पर आधारित थी और यह जांच का विषय है कि वादा झूठा था या नहीं, जिसे ट्रायल में तय किया जाना चाहिए।
न्यायालय की टिप्पणी
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने कहा कि वयस्क महिला द्वारा दी गई सहमति केवल इस कारण अमान्य नहीं हो जाती कि रिश्ता बाद में विवाह में परिवर्तित नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि धारा 376 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए यह आवश्यक है कि शादी का वादा केवल सहमति प्राप्त करने का माध्यम था और आरोपी का इरादा शुरू से ही शादी करने का नहीं था।
कोर्ट ने पाया कि दोनों पक्ष लंबे समय तक साथ रहे और उनके बीच बार-बार शारीरिक संबंध बने, जो एक सहमति वाले रिश्ते की ओर संकेत करता है, न कि प्रारंभिक धोखाधड़ी की ओर।
चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही रद्द
उच्च न्यायालय ने इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, देहरादून की अदालत में लंबित आपराधिक कार्यवाही और 22 जुलाई 2023 की चार्जशीट को पूरी तरह से रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना ठोस आधार के आपराधिक मुकदमे को जारी रखना आरोपी के उत्पीड़न का कारण बन सकता है।
यह फैसला ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सहमति वाले संबंध बाद में विवाह में परिवर्तित नहीं हो पाते और उन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।
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