दिल्ली दहलाने की साजिश का पर्दाफाश : डॉक्टरों ने रचा था ‘जिहादी नेटवर्क’ -लालकिला ब्लास्ट केस में NIA का 7500 पन्नों का चार्जशीट पेश
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को दहला देने वाले लाल किला कार बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। एनआईए ने 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों का विशाल आरोपपत्र दाखिल करते हुए दावा किया है कि यह कोई सामान्य आतंकी हमला नहीं, बल्कि भारत सरकार को उखाड़ फेंकने और देश में शरीयत शासन लागू करने की खतरनाक साजिश थी।
एनआईए के मुताबिक इस पूरे आतंकी नेटवर्क का नेतृत्व पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी कर रहा था, जो फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन विभाग का पूर्व सहायक प्रोफेसर था। एजेंसी का दावा है कि आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद नामक आतंकी संगठन से जुड़े थे, जो भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय अल-कायदा का सहयोगी संगठन माना जाता है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 10 नवंबर को लाल किला इलाके में हुए हाई इंटेंसिटी कार बम विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। धमाके से इलाके में भारी तबाही मच गई थी।
एनआईए जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने 2022 में श्रीनगर में गुप्त बैठक कर संगठन का पुनर्गठन किया और “ऑपरेशन हेवनली हिंद” नाम से देशविरोधी अभियान शुरू किया। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने, नए सदस्य भर्ती करने और हिंसक जिहादी विचारधारा फैलाने का संगठित नेटवर्क तैयार किया था।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि आरोपियों ने बाजार में आसानी से मिलने वाले रसायनों से अत्यंत घातक विस्फोटक टीएटीपी तैयार किया। एनआईए के अनुसार कई परीक्षणों के बाद इस विस्फोटक को और अधिक खतरनाक बनाया गया था। जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने विभिन्न प्रकार के आईईडी तैयार कर उनका परीक्षण किया और ड्रोन व रॉकेट आधारित विस्फोटक हमलों की भी तैयारी की थी।
एजेंसी ने दावा किया है कि आरोपियों के पास एके-47, क्रिंकोव राइफल, कारतूस और अवैध हथियार भी मौजूद थे। जांच के दौरान जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में छापेमारी की गई।
एनआईए ने इस मामले में 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री को साक्ष्य बनाया है। फोरेंसिक जांच, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और वॉयस एनालिसिस के जरिए पूरे आतंकी मॉड्यूल की परतें खोली गईं।
फिलहाल इस मामले में 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि कई संदिग्ध अब भी फरार बताए जा रहे हैं। एनआईए का कहना है कि देशभर में फैले इस नेटवर्क की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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