हल्दूचौड़ में गौसेवकों ने उठाए गंभीर सवाल -गौवंश संरक्षण को लेकर सरकार से ठोस कदम की मांग

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हल्दूचौड़। प्रदेश में सड़कों पर भटक रहे बेसहारा गौवंश और उनकी लगातार हो रही दुर्दशा को लेकर हल्दूचौड़ में गौसेवकों ने सरकार के समक्ष गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शनिवार को हल्दूचौड़ में आयोजित प्रेस वार्ता में गौ सेवक विनोद चंद्र भट्ट ने गौ माता को राज्य माता का संवैधानिक दर्जा देने की मांग उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार से प्रभावी कानून बनाने की अपील की।

भट्ट ने कहा कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और सनातन परंपरा में गौ माता का विशेष स्थान होने के बावजूद आज गौवंश सड़कों पर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहा है और कूड़े में भोजन तलाशने को मजबूर है। यह स्थिति समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंताजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस नीति, संरक्षण कानून और मजबूत गौशाला व्यवस्था से ही इस समस्या का समाधान संभव है।

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प्रेस वार्ता के दौरान भट्ट ने बताया कि गौ संरक्षण की मांग को लेकर वे हरिद्वार से देहरादून तक दंडवत यात्रा कर चुके हैं और देहरादून में आमरण अनशन के माध्यम से भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा न मानते हुए, राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ विषय बताया।

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प्रदेश के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा सहित 36 विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री को समर्थन पत्र भेजा जा चुका है। गौसेवकों ने आगामी विधानसभा सत्र में गौ माता को “राज्य माता” घोषित करने संबंधी प्रस्ताव सदन में लाने की मांग की है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी यह कहा कि जब तक प्रदेश में गौशालाओं को पर्याप्त संसाधन और स्थायी नीति नहीं मिलेगी, तब तक बेसहारा गौवंश की समस्या समाप्त नहीं हो सकेगी।

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गौ सेवक विनोद चंद्र भट्ट ने युवाओं से गौ सेवा अभियान से जुड़ने की अपील की। उनका कहना था कि यह केवल धार्मिक आस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी गहरे रूप से जुड़ा हुआ है।

हल्दूचौड़ की इस प्रेस वार्ता के बाद प्रदेश में गौवंश संरक्षण को लेकर यह सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है कि सरकार कब तक ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।

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