नहर भूमि अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट ने याचिका की निस्तारित -सीमांकन रिपोर्ट का इंतजार करने के निर्देश

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सिंचाई विभाग की भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़े मामले में दायर रिट याचिका को समयपूर्व (प्री-मैच्योर) मानते हुए निस्तारित कर दिया है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने कहा कि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति का निर्धारण किए बिना न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं है, क्योंकि मामले में सीमांकन की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। मामला हल्द्वानी क्षेत्र में जमरानी नहर निर्माण परियोजना से संबंधित है।


याचिकाकर्ता हिमालयन ग्रिट्स ने 7 फरवरी 2026 के आदेश तथा 22 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी थी। नोटिस में सिंचाई विभाग की नहर से संबंधित भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि जिस भूमि को अतिक्रमित बताया जा रहा है, वह उसकी स्वयं की भूमि है और उसने किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया है।

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सुनवाई के दौरान सिंचाई विभाग की ओर से अधिवक्ता योगेश पांडे ने न्यायालय को बताया कि भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए 12 मई 2026 को विभागीय भूमि के सीमांकन हेतु समिति गठित करने का निर्णय लिया गया था। इस तथ्य का याचिकाकर्ता की ओर से भी विरोध नहीं किया गया।

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अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि जिलाधिकारी नैनीताल ने 23 मई 2026 को एसडीएम हल्द्वानी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है, जो संबंधित भूमि का सर्वेक्षण और सीमांकन करेगी। न्यायालय ने माना कि समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट आने से पहले याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय की शरण लेना जल्दबाजी थी।

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हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को समिति की जांच और सीमांकन रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए था। हालांकि न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि सर्वेक्षण एवं सीमांकन की पूरी प्रक्रिया के दौरान याचिकाकर्ता को उपस्थित रहने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। इसी टिप्पणी के साथ न्यायालय ने रिट याचिका का अंतिम रूप से निस्तारण कर दिया तथा मामले से जुड़े सभी लंबित प्रार्थना पत्रों को भी समाप्त मान लिया।

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