रेल परियोजनाओं में एस्केप टनल को पैरेलल रोड के रूप में विकसित करने के निर्देश -कर्णप्रयाग-बागेश्वर विस्तार पर भी जोर
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित रेल परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेल टनलों के साथ बनने वाली एस्केप टनलों को भविष्य में समानांतर सड़कों (पैरेलल रोड) के रूप में विकसित करने की व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने विशेष रूप से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना में निर्मित एस्केप टनलों के संभावित उपयोग पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक रेल लाइन विस्तार की संभावनाओं का भी अध्ययन करने को कहा।
बुधवार को सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन परियोजना पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत विभिन्न वैकल्पिक मार्गों पर विचार किया जाए और अधिक से अधिक क्षेत्रों एवं जनता को इसका लाभ मिले, इसके लिए अल्मोड़ा और सोमेश्वर क्षेत्र को जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम किया जाए। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का आग्रह करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए, ताकि निर्माण कार्य को गति मिल सके।
मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के लिए इंटीग्रेटेड प्लान तैयार करने को कहा, जिससे स्टेशन के आसपास स्थानीय लोगों के लिए बाजार विकसित किए जा सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माणाधीन रेलवे स्टेशनों में स्वयं सहायता समूहों एवं राज्य के स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। साथ ही स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों में लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए तथा होमस्टे और अन्य योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेलवे स्टेशनों के आसपास स्थित गांवों, कस्बों, धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के समग्र विकास के लिए रोडमैप तैयार किया जाए और इन क्षेत्रों का समुचित पुनर्विकास सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में उत्तराखंड आने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
बैठक में बताया गया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का 72.5 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि टनल निर्माण का 95.30 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है। परियोजना के अंतर्गत कुल 28 टनलों का निर्माण किया गया है, जिनमें 16 मुख्य टनल और 12 एस्केप टनल शामिल हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशनों का निर्माण विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक थीम पर किया जा रहा है। इनमें शिवपुरी स्टेशन को नीलकंठ महादेव, ब्यासी को महर्षि वेदव्यास, देवप्रयाग को समुद्र मंथन, जनासु को उत्तराखंड संस्कृति, मलेथा को वीर माधो सिंह भंडारी, श्रीनगर को मां राजराजेश्वरी, धारी देवी को मां धारी देवी, तिलनी को केदारनाथ, घोलतीर को पांच महादेव, गौचर को बाल गोविंद कृष्ण और कर्णप्रयाग स्टेशन को बद्रीनाथ एवं राधा-कृष्ण थीम पर विकसित किया जा रहा है।
टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन परियोजना के संबंध में बताया गया कि रेलवे द्वारा तीन सर्वेक्षण विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही अल्मोड़ा और सोमेश्वर को जोड़ने सहित अन्य वैकल्पिक मार्गों पर भी कार्य किया जा रहा है।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव ब्रजेश कुमार संत, पंकज पांडे, मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि रेलवे के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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