पहाड़ की वादियों से निकला सुरों का सितारा -बिना गुरु के मयंक बिष्ट ने रचा इतिहास
हल्द्वानी। पहाड़ी आर्मी की नगर अध्यक्ष कविता जीना ने बताया कि उत्तराखंड की शांत और सुरम्य वादियों में बसे नैनीताल जिले के रामगढ़ ब्लॉक के छोटे से गांव नथुवाखान का एक युवा आज अपनी आवाज से लोगों के दिलों में खास जगह बना रहा है। इस युवा का नाम है मयंक बिष्ट, जिसने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
बचपन से ही मयंक का झुकाव संगीत की ओर रहा। जहां अन्य बच्चे खिलौनों से खेलते थे, वहीं मयंक सुरों और धुनों में खोए रहते थे। ना कोई विशेष सुविधा, ना कोई प्रशिक्षित गुरु, लेकिन मन में कुछ कर दिखाने का जज्बा हमेशा बना रहा। पहाड़ की ठंडी हवाओं और प्राकृतिक वातावरण ने जैसे उनके भीतर संगीत का बीज बो दिया।
मयंक बिष्ट ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नथुवाखान और रामगढ़ के विद्यालयों से प्राप्त की। उनके गुरुजनों ने भी उनकी आवाज में एक अलग चमक और संभावना देखी। लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने राज्य स्तरीय गायन प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल कर गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया।
मयंक का कहना है कि संगीत ईश्वर का दिया हुआ अनमोल उपहार है और यदि उन्हें यह कला मिली है तो वह इसे पूरी मेहनत और लगन से आगे बढ़ाएंगे। आज मयंक अपने मधुर स्वरों से भगवान की आराधना करते नजर आते हैं। वह जागरण, श्रीमद्भागवत कथा, शिव पुराण, सुंदरकांड, देवी भागवत और रामायण जैसे धार्मिक आयोजनों में भजन प्रस्तुत करते हैं। उनकी सुरीली आवाज और भक्ति से भरे भजन श्रद्धालुओं को भावविभोर कर झूमने पर मजबूर कर देते हैं।
गांव की गलियों से शुरू हुआ यह सफर अब लोगों के दिलों तक पहुंच चुका है और मयंक बिष्ट पहाड़ की नई संगीत पहचान बनते जा रहे हैं।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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