UK…75% विकलांगता, लेकिन कमाई का नुकसान 100%: हाईकोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा -ड्राइवरों के हक में बड़ा फैसला
नैनीताल। हाईकोर्ट नें एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई पेशेवर चालक सड़क दुर्घटना के बाद वाहन चलाने के लिए पूरी तरह अयोग्य हो जाता है, तो उसकी कमाने की क्षमता में कमी को 100 प्रतिशत माना जाएगा, भले ही उसकी शारीरिक विकलांगता इससे कम हो।
न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने ‘भूपेंद्र सिंह रावत बनाम रवींद्र प्रकाश पंत’ मामले में यह आदेश पारित किया। अदालत ने वर्कमैन कम्पेन्सेशन कमिश्नर/जिला मजिस्ट्रेट पिथौरागढ़ के पुराने आदेश में संशोधन करते हुए मुआवजे की राशि बढ़ा दी।
मामले के अनुसार, भूपेंद्र सिंह रावत वर्ष 2009 से वाहन चालक के रूप में कार्यरत थे। 8 मार्च 2010 को मुनस्यारी में वाहन चलाते समय वह गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में उन्हें कई फ्रैक्चर हुए और मेडिकल बोर्ड ने उन्हें 75 प्रतिशत स्थायी विकलांग घोषित किया।
निचली अदालत ने उनकी विकलांगता 75 प्रतिशत मानते हुए कमाने की क्षमता में केवल 60 प्रतिशत हानि के आधार पर ₹2,39,457 मुआवजा तय किया था। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई चालक अपनी शारीरिक स्थिति के कारण दोबारा ड्राइविंग नहीं कर सकता और उसका लाइसेंस भी रिन्यू नहीं हो सकता, तो उसकी अर्जन क्षमता का नुकसान पूरी तरह यानी 100 प्रतिशत माना जाएगा।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और ‘बीरेन्द्र कुमार’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि पेशेवर ड्राइवर के लिए वाहन चलाना ही उसका मूल व्यवसाय है, इसलिए उससे वंचित होना पूर्ण आर्थिक अक्षमता के बराबर है।
हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए मुआवजा राशि ₹2.39 लाख से बढ़ाकर ₹3,99,096 करने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने ब्याज दर में भी संशोधन करते हुए कहा कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 की धारा 4-A(3) के तहत दावेदार को दुर्घटना के एक महीने बाद यानी 7 अप्रैल 2010 से पूरी राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलेगा।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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