दिपावली के बाद लागू होगा UPI पेमेंट पर MDR चार्ज -NPCI ने टाला फैसला
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले यूपीआई भुगतान को लेकर व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर सामने आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। यह व्यवस्था अब दिवाली के बाद लागू होगी। हालांकि, इसकी नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।
₹2,000 से अधिक के भुगतान पर MDR का प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क लगाने की बात कही गई है। इस शुल्क को बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई ऐप्स के बीच साझा किया जाएगा।
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, पेट्रोल-डीजल और कृषि से जुड़े क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर प्रतिशत के बजाय प्रति ट्रांजैक्शन पांच रुपये का निर्धारित शुल्क प्रस्तावित है।
वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकरों से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR लगाने का प्रस्ताव है। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों को राहत
प्रस्तावित व्यवस्था में आम उपभोक्ताओं के लिए कई राहतें भी शामिल हैं।
- व्यक्तिगत ट्रांसफर मुफ्त: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजने यानी P2P लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
- ₹2,000 तक की खरीदारी: दुकानों और मॉल में ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।
- छोटे व्यापारियों को राहत: P2PM श्रेणी के तहत यूपीआई क्यूआर कोड से हर महीने एक लाख रुपये तक का भुगतान स्वीकार करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से छूट देने का प्रावधान है।
त्योहारी कारोबार पर नहीं पड़ेगा तत्काल असर
NPCI की ओर से फैसले को टालने का उद्देश्य त्योहारी सीजन के दौरान कारोबार पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंकाओं को कम करना माना जा रहा है। इससे व्यापारियों को फिलहाल राहत मिलेगी और डिजिटल भुगतान व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
हालांकि, MDR से संबंधित शुल्क, छूट और लागू होने की तारीख को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट करने के लिए NPCI की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना जरूरी है। आम उपभोक्ताओं के सामान्य यूपीआई भुगतान और व्यक्तिगत बैंक ट्रांसफर को इस प्रस्तावित बदलाव से अलग रखा गया है।
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