पंतनगर विश्वविद्यालय ने तीन संस्थानों से किए एमओयू -पारंपरिक ज्ञान और कृषि अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

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पंतनगर, 29 सितंबर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में अनुसंधान, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए तीन महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों के माध्यम से पारंपरिक एवं स्थानीय ज्ञान, खाद्य प्रणालियों, विद्यार्थियों के प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य अनुसंधान को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए नवाचार और ज्ञान के प्रभावी हस्तांतरण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इन एमओयू के माध्यम से पारंपरिक एवं स्थानीय ज्ञान, खाद्य प्रणालियों, प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के कौशल विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे। विश्वविद्यालय भविष्य में भी प्रतिष्ठित संस्थानों और विभिन्न संगठनों के साथ सहयोग को मजबूत करते हुए शिक्षा, अनुसंधान एवं समाजोपयोगी गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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टेरी के साथ पर्वतीय और जलवायु अनुकूल कृषि पर होगा शोध

पहला एमओयू द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी), नई दिल्ली के साथ हुआ। विश्वविद्यालय की ओर से निदेशक शोध डॉ. एसके वर्मा और संयुक्त निदेशक शोध डॉ. पीके सिंह तथा टेरी की ओर से महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के तहत पर्वतीय कृषि, जलवायु अनुकूल कृषि और सतत कृषि के क्षेत्र में शोध कार्य किए जाएंगे। साथ ही विद्यार्थियों एवं वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान तथा कृषि क्षेत्र में नए स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सहयोग किया जाएगा।

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स्थानीय खाद्य प्रणालियों और महिला-केंद्रित प्रशिक्षण पर जोर

दूसरा एमओयू विश्वविद्यालय और सोल ट्रेक प्राइवेट लिमिटेड, देहरादून के बीच हुआ। इस पर सोल ट्रेक की ओर से निदेशक कनिका रावत एवं डॉ. विजय प्रताप सिंह रावत ने हस्ताक्षर किए।

समझौते के अंतर्गत पारंपरिक एवं स्थानीय खाद्य प्रणालियों, स्वदेशी ज्ञान, सामुदायिक प्रशिक्षण, महिला-केंद्रित प्रशिक्षण तथा विद्यार्थियों के प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप के क्षेत्र में सहयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य पारंपरिक खाद्य प्रथाओं और स्थानीय ज्ञान को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान कर आम लोगों तक पहुंचाना है। विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।

लुप्तप्राय ‘तिलकचंदन’ धान के पुनरुद्धार और व्यवसायीकरण पर समझौता

तीसरा एमओयू विश्वविद्यालय फार्म, पंतनगर और ओराइजो राइसघर एग्रोवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के बीच पारंपरिक एवं लुप्तप्राय ‘तिलकचंदन’ चावल की किस्म के पुनरुद्धार, खेती और व्यवसायीकरण को लेकर हुआ।

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विश्वविद्यालय की ओर से मुख्य महाप्रबंधक, विश्वविद्यालय फार्म डॉ. राजेश प्रताप सिंह तथा ओराइजो राइसघर एग्रोवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड की ओर से कंपनी के सह-संस्थापक डॉ. कौशल जायसवाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के माध्यम से 1950 और 1960 के दशक में प्रचलित सुगंधित धान की प्रजाति ‘तिलकचंदन’ की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने तथा इसके चावल को पुनः आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक, शोध केंद्रों के संयुक्त निदेशक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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