पंजाबी परिवार के बेटे ने रचा इतिहास : विश्व कप में शुरुआती एकादश में उतरने वाले पहले भारतीय मूल के फुटबॉलर बने सरप्रीत सिंह
नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के मिडफील्डर ने फुटबॉल विश्व कप में इतिहास रचते हुए भारतीय मूल के पहले ऐसे खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया है, जिन्हें किसी विश्व कप मैच की शुरुआती एकादश में जगह मिली। 27 वर्षीय सरप्रीत ईरान के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ रहे मुकाबले में न्यूजीलैंड की ओर से शुरुआत से मैदान में उतरे और अपने दमदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा।
ऑकलैंड में पंजाबी माता-पिता के घर जन्मे सरप्रीत ने इस मुकाबले के साथ विश्व कप में पदार्पण किया। न्यूजीलैंड के मुख्य कोच ने उन पर भरोसा जताते हुए शुरुआती एकादश में शामिल किया। दस नंबर की जर्सी पहनकर खेल रहे सरप्रीत ने ईरान के गोल पर तीन प्रयास किए, हालांकि वे गोल करने में सफल नहीं हो सके। उन्होंने लगभग पूरा मैच खेला और 90वें मिनट में उन्हें बदला गया।
न्यूजीलैंड अब ग्रुप-जी में अपना अगला मुकाबला 21 जून को वैंकूवर में मिस्र के खिलाफ खेलेगा।
इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के भारतीय मूल के विंगर ने भी विश्व कप में पदार्पण किया था। तुर्किए के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की 2-0 की जीत में वह 60वें मिनट में स्थानापन्न खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरे थे। मेलबर्न में जन्मे वेलुपिल्ले की मां एंग्लो-इंडियन और पिता श्रीलंकाई तमिल मूल के मलेशियाई हैं।
विश्व कप इतिहास में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी बेहद सीमित रही है। इससे पहले केवल ने 2006 विश्व कप में फ्रांस की ओर से दो मैच खेले थे, लेकिन वह दोनों बार स्थानापन्न खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरे थे।
मौजूदा टूर्नामेंट में भारतीय मूल के दो अन्य खिलाड़ियों— (कांगो) और (कतर)—को भी खेलने का मौका मिल सकता है। अब फुटबॉल प्रेमियों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ये खिलाड़ी भी विश्व कप के मंच पर अपनी छाप छोड़ पाएंगे।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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