uttarakhand-एक सप्ताह से हाईवे पर अंधेरा, हादसे के इंतजार में जिम्मेदार
-मोतीनगर के पास बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों से बढ़ा खतरा, सांसद और सड़क परिवहन राज्य मंत्री से शिकायत के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
हल्द्वानी। राष्ट्रीय राजमार्ग लालकुआं-काठगोदाम पर मोतीनगर के पास पिछले एक सप्ताह से भी अधिक समय से स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर रात के समय पसरा अंधेरा वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इसी अंधेरे वाले हिस्से में रात के समय आवारा पशुओं के झुंड सड़क पर जमा रहते हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्ट्रीट लाइटें खराब होने के बाद कई बार संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। यहां तक कि सांसद और सड़क परिवहन राज्य मंत्री को भी फोन के माध्यम से समस्या से अवगत कराया गया, इसके बावजूद अब तक लाइटें चालू नहीं हो सकी हैं। इससे स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
अंधेरे में सड़क पर दिखाई नहीं देते आवारा पशु
मोतीनगर के पास हाईवे का यह हिस्सा रात में काफी खतरनाक हो जाता है। स्ट्रीट लाइटें बंद होने के कारण सड़क पर बैठे या अचानक सामने आ जाने वाले आवारा पशु वाहन चालकों को समय पर दिखाई नहीं देते। तेज रफ्तार वाहनों के बीच पशुओं के अचानक सड़क पर आने से दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्ट्रीट लाइटों को ठीक नहीं कराया गया तो किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेगा। सवाल यह भी है कि जब व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोशनी की व्यवस्था दुरुस्त रखना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है, तो शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
एक सप्ताह पहले सांड की हो चुकी है मौत
इस स्थान की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब एक सप्ताह पूर्व इसी क्षेत्र में एक सांड की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो गई थी। हादसे के बाद भी सड़क की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना चेतावनी के तौर पर पर्याप्त है, लेकिन इसके बावजूद बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक नहीं कराया गया।
बड़ा हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब हाईवे पर लगातार आवारा पशुओं की मौजूदगी बनी रहती है और स्ट्रीट लाइटें भी लंबे समय से बंद हैं, तो किसी बड़े हादसे की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लोगों ने संबंधित विभाग से तत्काल स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त कराने, हाईवे पर प्रकाश व्यवस्था बहाल करने और आवारा पशुओं को हटाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि हाईवे पर अंधेरा और सड़क पर आवारा पशुओं का जमावड़ा दोहरी मुसीबत बन चुका है। यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटने का इंतजार करना पड़ेगा।
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