उत्तराखंड…त्वरित न्याय ही विकसित भारत की नींव, अंग्रेजों के कानून नहीं -न्याय की नई व्यवस्था लागू : अर्जुन राम मेघवाल
हल्द्वानी, 27 जून। अधिवक्ता परिषद देवभूमि (उत्तराखंड) के प्रथम प्रांत अधिवेशन का भव्य शुभारंभ शनिवार को हल्द्वानी स्थित एफटीआई परिसर में राष्ट्रभक्ति और विधिक चेतना के वातावरण के बीच हुआ। अधिवेशन का मुख्य विषय “सुलभ न्याय, समाज की सुरक्षा, उत्तराखण्ड की विधिक चुनौतियाँ एवं अधिवक्ता के दायित्व” रखा गया।
उद्घाटन सत्र में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश में न्याय व्यवस्था को अधिक त्वरित, सुलभ और जनहितकारी बनाने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय के दंड आधारित कानूनों की जगह अब न्याय आधारित नई व्यवस्था लागू की गई है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के माध्यम से आम नागरिकों को शीघ्र न्याय मिलेगा। उन्होंने ई-कोर्ट, ई-एफआईआर, ई-पोर्टल और टेली-लॉ जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं को न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव बताया।
कार्यक्रम में उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री श्रीहरि बोरेकर ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना अधिवक्ता समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिवक्ताओं से समाज में विधिक जागरूकता बढ़ाने और नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण, न्यायिक सुधार, न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण, गौरक्षा और संविधान के प्रति जनजागरण जैसे विषयों पर अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानव का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। विकसित भारत के निर्माण में त्वरित और सुलभ न्याय को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने परिवार प्रबोधन पर भी बल दिया।
इस अवसर पर क्षेत्रीय संयोजक विपिन त्यागी ने अधिवेशन को संगठन के इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह आयोजन अधिवक्ता परिषद देवभूमि को नई दिशा और कार्ययोजना प्रदान करेगा।
कार्यक्रम में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सांसद अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्षा जानकी सूर्या, प्रदेश महामंत्री अनुज शर्मा, आयोजन समिति अध्यक्ष पीयूष तिवारी सहित प्रदेशभर से आए सैकड़ों अधिवक्ता, पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अधिवेशन का उद्घाटन सत्र राष्ट्रसेवा, विधिक जागरूकता और त्वरित न्याय के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। आगामी सत्रों में उत्तराखंड की विधिक चुनौतियों, संगठन विस्तार और राष्ट्र निर्माण में अधिवक्ताओं की भूमिका पर विस्तृत मंथन किया जाएगा। :::
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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