8 लाख आय वाले EWS को 25 लाख की फीस पर राहत नहीं -सुप्रीम कोर्ट बोला- फीस नहीं भर सकते तो स्कॉलरशिप लें

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नई दिल्ली। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित 8 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस को सरकारी संस्थानों के बराबर नहीं किया जा सकता और यदि छात्र फीस वहन नहीं कर सकते तो वे छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) का सहारा लें।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में सालाना फीस 18.9 लाख से 25 लाख रुपये तक है, ऐसे में 8 लाख रुपये आय सीमा वाले EWS छात्रों के लिए आरक्षण का लाभ व्यावहारिक रूप से बेअसर हो जाता है।

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थान स्व-वित्त पोषित होते हैं और उनसे सरकारी कॉलेजों जैसी रियायती फीस की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि निजी संस्थान सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लें। सरकारी संस्थानों को अनुदान और सब्सिडी मिलती है, जबकि निजी कॉलेज अपने संसाधनों से संचालित होते हैं।”

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जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि देश में डॉक्टरों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए निजी मेडिकल कॉलेजों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “यदि निजी मेडिकल कॉलेज शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना बंद कर दें तो डॉक्टरों की उपलब्धता प्रभावित होगी।”

फीस वहन करने में असमर्थता के मुद्दे पर अदालत ने टिप्पणी की, “अगर आप भुगतान नहीं कर सकते, तो स्कॉलरशिप लें।”

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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि EWS आरक्षण केवल प्रवेश प्रक्रिया तक सीमित है। इससे निजी कॉलेजों में कम या सब्सिडी वाली फीस पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं मिलता। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यापक कानूनी प्रश्न उठता है तो वह भविष्य में विचार के लिए खुला रहेगा, लेकिन इस मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

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