शादीशुदा व्यक्ति का बालिग महिला के साथ लिव-इन में रहना अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
नई दिल्ली। Allahabad High Court ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई शादीशुदा पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से रह रहा है, तो इसे स्वतः अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि समाज की नैतिक धारणाएँ और कानून की परिभाषा अलग-अलग होती हैं। जब तक कोई कानून नहीं टूटता, केवल सामाजिक आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
यह टिप्पणी जस्टिस J. J. Munir और जस्टिस Tarun Saxena की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान की। अदालत ने याचिकाकर्ता जोड़े की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए पुलिस को उन्हें सुरक्षा देने का निर्देश दिया, क्योंकि दोनों ने जान का खतरा होने की बात कही थी।
परिवार को चेतावनी, पुलिस को जिम्मेदारी
अदालत ने महिला के परिवार को सख्त निर्देश दिए कि वे किसी भी रूप में जोड़े को परेशान न करें—न घर जाकर, न फोन या संदेश के माध्यम से और न ही किसी तीसरे व्यक्ति के जरिए संपर्क करने की कोशिश करें। साथ ही शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। कोर्ट ने कहा कि वयस्क नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का कर्तव्य है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
हाईकोर्ट ने Shakti Vahini v. Union of India (2018) का हवाला देते हुए कहा कि ऑनर किलिंग से जुड़े मामलों में पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए।
अपहरण के आरोप का मामला
यह मामला उत्तर प्रदेश के जैतीपुर थाना क्षेत्र का है, जहां महिला की मां ने 8 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि युवक उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया। पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita Section 87 के तहत मामला दर्ज किया था, जिसे रद्द कराने के लिए जोड़ा हाईकोर्ट पहुंचा।
अदालत में क्या दलील दी गई
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं। विरोधी पक्ष ने दलील दी कि पुरुष पहले से शादीशुदा है, इसलिए यह संबंध अवैध है। हालांकि अदालत ने कहा कि सहमति से साथ रहने वाले बालिगों के खिलाफ केवल इस आधार पर आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता।
ऑनर किलिंग के खतरे पर कोर्ट की चिंता
महिला ने पहले ही पुलिस को लिखित शिकायत देकर बताया था कि उसे अपने परिवार से ऑनर किलिंग का खतरा है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए थे।
मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी, जिसमें दोनों पक्षों से जवाब मांगा गया है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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