लोकसभा में गिरी सरकार की बड़ी परीक्षा : दो-तिहाई बहुमत न मिलने से 131वां संविधान संशोधन विधेयक फेल, तीनों बिल वापस

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लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को सरकार पारित नहीं करा सकी। सदन में हुए मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 सांसदों ने वोट किया। कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, लेकिन संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण इसे पारित कराने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई यानी 352 वोटों की जरूरत थी। आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसके बाद सरकार ने इससे जुड़े बाकी दो विधेयक भी वापस ले लिए।


तीनों विधेयकों को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार ने संसद का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया था। लोकसभा में विधेयकों पर करीब 21 घंटे तक चर्चा चली, जिसमें 56 महिला सांसदों समेत 130 सदस्यों ने पक्ष और विपक्ष में अपनी बात रखी। इस दौरान सदन में कई बार हंगामा भी देखने को मिला।

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वोटिंग के बाद संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी वापस लेने की घोषणा कर दी।


लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने कहा कि विपक्ष ने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। उनका कहना था कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं बल्कि भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का प्रयास है। उन्होंने पहले भी सदन में कहा था कि इन विधेयकों का महिलाओं के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है और यह केवल निर्वाचन क्षेत्रों के नक्शे को बदलने का तरीका है।


समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार की “फरेबी गाड़ी” फिर से रुक गई है और अब वे अपनी कोशिशों में कमी का बहाना बनाएंगे। वहीं Priyanka Gandhi ने कहा कि महिला आरक्षण को 2011 की जनगणना और परिसीमन से जोड़ना प्रधानमंत्री का महिलाओं का मसीहा बनने का खोखला प्रयास था, जो असफल हो गया।

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया है और 23 अप्रैल को दिल्ली के “घमंड” को और उसके समर्थकों को हराया जाएगा।


वहीं केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने चर्चा के दौरान कहा था कि यदि विधेयक पारित नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी और देश की महिलाएं सब देख रही हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी सांसदों से अपील करते हुए कहा था कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और देश की नारी शक्ति को उसका हक देने के लिए इस संशोधन का समर्थन करें।

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सरकार द्वारा लाए गए तीनों विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल थे। संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सके। परिसीमन संशोधन विधेयक में नई जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण और परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान था, जबकि तीसरे विधेयक में केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनों में संशोधन की बात कही गई थी।

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