वोटर लिस्ट से नाम कटने पर नहीं जाएगी नागरिकता -सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की शक्तियों पर लगाई सीमा

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नई दिल्ली, 27 मई। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट से किसी व्यक्ति का नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो गई। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग केवल चुनावी उद्देश्यों के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन वह किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार नहीं रखता।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने एसआईआर की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका केवल यह तय करने तक सीमित है कि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने योग्य है या नहीं।

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सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम नागरिकता संबंधी संदेह के आधार पर मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो चुनाव आयोग को ऐसे मामलों को चार सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेजना होगा। इसके बाद संबंधित प्राधिकारी कानून के अनुसार नोटिस जारी करेगा, सुनवाई करेगा और फिर नागरिकता पर फैसला लेगा।

पीठ ने कहा कि आयोग का निर्णय केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित रहेगा और उसे नागरिकता निर्धारण का अंतिम अधिकार नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी के फैसले के बाद ही किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जोड़ा या हटाया जाएगा।

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दरअसल, एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान उन मतदाताओं के नामों की जांच की जा रही थी जिनके नाम वर्ष 2002-2003 की मतदाता सूची में नहीं थे। ऐसे लोगों से अपने पैतृक संबंध और नागरिकता से जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा गया था। इस प्रक्रिया को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनमें तर्क दिया गया कि चुनाव आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में नागरिकता के आधार पर मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के मामलों में भी निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि ऐसे सभी मामलों को चार सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाए और विधानसभा तथा निकाय चुनावों से पहले प्रक्रिया पूरी की जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम अनुपस्थिति या अन्य कारणों से मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें अपील करने का अधिकार रहेगा। इस फैसले को नागरिकता और मतदान अधिकारों को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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