करोड़ों की साइबर ठगी का पर्दाफाश, निजी बैंक का उपप्रबंधक समेत तीन गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पुलिस ने बृहस्पतिवार को करोड़ों रुपये की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए एक निजी बैंक के उपप्रबंधक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह देशभर के लोगों से ऑनलाइन गेमिंग और अन्य साइबर माध्यमों से ठगी कर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में लिप्त था।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) कमलेश दीक्षित ने बताया कि साइबर अपराध प्रकोष्ठ और साइबर अपराध थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में चिनहट स्थित इंडसइंड बैंक के उप शाखा प्रबंधक उत्तम कुमार विश्वास, बस्ती जिले के उमाकांत और राजीव विश्वास को गिरफ्तार किया गया।
डीसीपी ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी कंपनियां बनाकर कई बैंक खाते खोले थे, जिनका उपयोग धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को इधर-उधर करने में किया जाता था। बैंक उपप्रबंधक उत्तम विश्वास इन खातों को खोलने में सक्रिय सहयोग करता था और इसके बदले में 10 से 20 प्रतिशत कमीशन लेता था।
पुलिस ने बताया कि बुधवार को महानगर क्रॉसिंग के पास गुप्त सूचना के आधार पर तीनों को दबोचा गया। पूछताछ में उमाकांत ने “आकाश रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड” नामक फर्जी कंपनी चलाने की बात स्वीकार की। इसी के माध्यम से लाखों रुपये के फर्जी खाते खोले गए थे।
डीसीपी के मुताबिक, आरोपियों ने अब तक लगभग 20 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा बैंक अधिकारी को कमीशन के रूप में दिया गया।
पुलिस ने छापेमारी कर कुर्सी रोड स्थित किरण एन्क्लेव से उत्तम विश्वास को गिरफ्तार किया और उसके पास से 30,000 रुपये नकद, पांच मोबाइल फोन, छह एटीएम कार्ड, दो आधार कार्ड और एक पैन कार्ड बरामद किए।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और आईटी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत साइबर अपराध थाना में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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