किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला : हाईकोर्ट ने नामजद आरोपियों को राहत देने से किया इनकार, सरकार से मांगी स्थिति रिपोर्ट

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नैनीताल। काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक और दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई की। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को कोई राहत देने से इनकार करते हुए राज्य सरकार से मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कोर्ट ने सरकार को बुधवार तक स्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।


मामले के अनुसार, बीते शनिवार देर रात हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में काशीपुर निवासी सुखवंत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने ऊधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा सहित कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि जमीन के एक मामले में उनके साथ धोखाधड़ी हुई है और उनसे करीब चार करोड़ रुपये ठग लिए गए।

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सुखवंत सिंह ने यह भी आरोप लगाया था कि इस मामले को लेकर बार-बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, बल्कि उन्हें डराया-धमकाया गया। आत्महत्या के बाद मृतक के भाई की तहरीर पर काशीपुर के आईटीआई थाने में 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया।

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पुलिस ने अमरजीत सिंह, दिव्या, रविन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविन्दर सिंह उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीष चौहान, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेन्द्र सिंह, विमल, विमल की पत्नी, देवेन्द्र, राजेन्द्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवंत सिंह बक्सौरा, बिजेन्द्र, पूजा और जहीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। यह मामला दो पक्षों के बीच जमीन से जुड़े विवाद का है और किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है। उन्होंने गिरफ्तारी पर रोक लगाने और दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग की।


दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए और फिलहाल याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दी।

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