UK…’VIP’ ऑडियो-वीडियो विवाद में सुरेश राठौर को हाईकोर्ट से आंशिक राहत -दो FIR रद्द, दो मामलों में जांच जारी
नैनीताल। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित ऑडियो-वीडियो विवाद मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर को आंशिक राहत देते हुए चार में से दो एफआईआर रद्द कर दी हैं, जबकि दो अन्य मामलों में जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेश राठौर की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया।
सुरेश राठौर ने देहरादून और हरिद्वार में भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी तथा पूर्व जिला पंचायत सदस्य द्वारा दर्ज चार अलग-अलग एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। राठौर का कहना था कि उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है, जबकि शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि सोशल मीडिया पर प्रसारित ऑडियो-वीडियो के जरिए उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।
अदालत ने पाया कि हरिद्वार के बहादराबाद और झबरेड़ा थानों में दर्ज एफआईआर संख्या 0534/2025 और 0356/2025 में लगाए गए आरोप देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0004/2026 से लगभग समान हैं। न्यायालय ने माना कि इन मामलों के शिकायतकर्ता स्वयं पीड़ित नहीं थे और वास्तविक पीड़ित पहले ही एफआईआर दर्ज करा चुका था। सुप्रीम कोर्ट के टी.टी. एंटनी और राजेंद्र बिहारी लाल मामलों में तय सिद्धांतों का हवाला देते हुए कोर्ट ने दोनों एफआईआर को “सक्सेसिव एफआईआर” मानकर निरस्त कर दिया।
हालांकि, नेहरू कॉलोनी देहरादून में आरती गौड़ द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 0420/2025 तथा डालनवाला थाने में दुष्यंत गौतम द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 0004/2026 को रद्द करने से अदालत ने इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन मामलों में संज्ञेय अपराध के तत्व दिखाई देते हैं और विस्तृत जांच आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी अपराध से संबंधित सूचना या साक्ष्य है तो उसे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाए। अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग जनहित के मुद्दे उठाने के लिए होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति की छवि खराब करने के लिए।
न्यायालय ने यह भी कहा कि यह जांच का विषय है कि कथित ऑडियो-वीडियो क्लिप किस उद्देश्य से प्रसारित किए गए और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा या सुनियोजित साजिश थी। इस पहलू की गहन जांच आवश्यक होने के कारण संबंधित एजेंसियों को जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है।
फैसले में कोर्ट ने सुरेश राठौर की दो याचिकाएं खारिज करते हुए उन्हें मिली अंतरिम राहत भी समाप्त कर दी, जबकि दो अन्य याचिकाएं स्वीकार करते हुए हरिद्वार में दर्ज दोनों एफआईआर रद्द कर दीं। साथ ही अदालत ने आरती गौड़ और दुष्यंत गौतम को सुरक्षा संबंधी आशंका होने पर डीजीपी और संबंधित एसएसपी से संपर्क करने की स्वतंत्रता देते हुए अधिकारियों को खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए।
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