44 डिग्री की आग में मजदूरी नहीं! — गौला नदी बंद कराने को मजदूरों का डीएम दफ्तर पर फूटा गुस्सा
हल्द्वानी। भीषण गर्मी के बीच गौला नदी में जारी खनन कार्य को लेकर मजदूरों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। गौला खनन मजदूर उत्थान समिति के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर मई माह के अंत के बाद नदी में खनन कार्य तत्काल बंद करने की मांग उठाई। मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उनकी मांग नहीं मानी तो मामला एनजीटी तक ले जाया जाएगा।


समिति अध्यक्ष रमेश चंद जोशी ने कहा कि नदी में तापमान असहनीय हो चुका है। पत्थर और बालू इतनी गर्म हो रही है कि मजदूर बीमार पड़ने लगे हैं और कई श्रमिक काम छोड़कर घर लौट चुके हैं। उन्होंने बताया कि 44 लाख घन मीटर खनिज निकासी की मूल स्वीकृति मई के पहले सप्ताह में ही समाप्त हो चुकी थी, इसके बाद सरकार ने 16 लाख घन मीटर अतिरिक्त खनन की अनुमति दी है, जिससे जून तक नदी संचालन की संभावना बन रही है।
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी, स्टोन क्रेशरों में पहले से मौजूद भारी भंडारण, डीजल की बढ़ती कीमतें और भाड़े में चार रुपये की गिरावट को देखते हुए अब नदी संचालन का कोई औचित्य नहीं बचता। समिति ने मांग की कि खनन कार्य तत्काल बंद कर अक्टूबर से दोबारा शुरू किया जाए।
महामंत्री जीवन कबडवाल ने दो टूक कहा कि यदि जिलाधिकारी ने मजदूरों की बात नहीं सुनी तो समिति शीघ्र ही एनजीटी में प्रार्थना पत्र दाखिल करेगी। वहीं सचिव इंद्र सिंह दयाल ने चेतावनी दी कि मई के बाद कोई भी वाहन नदी में नहीं उतरेगा और यदि प्रशासन ने जबरन संचालन कराया तो इससे सरकार की बड़ी किरकिरी होगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रधान ब्लॉक संगठन अध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष रुक्मणी नेगी, पूजा बिष्ट, राम सिंह नगरकोटी और प्रधान राधा भट्ट सहित कई लोग मौजूद रहे।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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