अब कुत्ते के काटने पर सरकार को देना होगा भारी मुआवजा -सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से राज्यों और ‘डॉग लवर्स’ को झटका

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नई दिल्ली। आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आवारा कुत्तों के काटने से किसी व्यक्ति की मौत या गंभीर चोट होती है, तो इसके लिए राज्य सरकारों को पीड़ितों को भारी मुआवजा देना होगा। साथ ही, कुत्तों को खुले में भोजन कराने वालों की जिम्मेदारी तय करने के भी संकेत दिए गए हैं।


जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणियां करते हुए सवाल किया कि क्या भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए हैं, इंसानों के लिए नहीं? अदालत ने कहा कि सड़कों पर आवारा कुत्तों को खुलेआम घूमने और उपद्रव मचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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‘अगर प्यार है तो अपने घर ले जाएं’
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के समर्थन में खड़े तथाकथित ‘डॉग लवर्स’ और संगठनों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाया। अदालत ने दो टूक कहा कि अगर किसी को कुत्तों से इतना ही लगाव है, तो उन्हें अपने घर या निजी परिसर में रखें। यदि ऐसा संभव नहीं है, तो उनकी वजह से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी से भी बचा नहीं जा सकता।

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कोर्ट ने विशेष रूप से एक 9 वर्षीय बच्चे की मौत का उल्लेख करते हुए पूछा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
जस्टिस मेहता की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब एक वकील ने आवारा कुत्तों को गोद लेने और ट्रैकिंग जैसे उपायों पर भावनात्मक दलील दी, तो जस्टिस संदीप मेहता ने हस्तक्षेप करते हुए कहा,
“काश, अनाथ बच्चों के लिए भी कभी ऐसे भावुक तर्क सुनने को मिलते। 2011 में जज बनने के बाद आज तक मैंने इंसानों के लिए इतनी भावुक दलीलें नहीं सुनीं।”
उन्होंने कहा कि सहानुभूति का दायरा सिर्फ जानवरों तक सीमित नहीं होना चाहिए।

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20 जनवरी को अगली सुनवाई
सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने दलील दी कि मौजूदा एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियम कई केंद्रीय और राज्य कानूनों के खिलाफ हैं। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई में केंद्र और राज्य सरकारों से इस मुद्दे पर गंभीर सवाल किए जाएंगे। गौरतलब है कि पहले अगली सुनवाई 15 जनवरी को होनी थी, लेकिन वकीलों की मांग पर अब इसे 20 जनवरी के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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