कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पहले प्राकृतिक बुद्धिमता का प्रयोग जरूरी: पद्मश्री डॉ. जोशी

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ऋषिकेश। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश में “भारतीय ज्ञान प्रणालियों के ढांचों के साथ मनोवैज्ञानिक निदान और उपचार प्रक्रियाओं के एकीकरण” विषय पर सातवां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि पद्मश्री व पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते दौर में भी मानव को पहले अपनी प्राकृतिक बुद्धिमत्ता का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बौद्ध तकनीकों और भारतीय ज्ञान परंपराओं को समझने पर जोर देते हुए कहा कि ये मानसिक संतुलन और जीवन प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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स्पीकिंगक्यूब ऑनलाइन मेंटल हेल्थ कंसल्टिंग फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में एकेडमी ऑफ माइंडफुल साइकोलॉजी, कैलिफोर्निया के अध्यक्ष प्रो. नील कोब्रिन ने मानसिक स्वास्थ्य में सचेतनता (माइंडफुलनेस) के महत्व पर प्रकाश डाला।

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वहीं आईएनटीआई विश्वविद्यालय, मलेशिया के उपनिदेशक प्रो. वेनोथ रेक्स ने नेतृत्व के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
सोंगस्टेन लाइब्रेरी के निदेशक डॉ. ताशी त्साम्फले ने दैनिक जीवन में सचेत रहने के लिए बौद्ध तकनीकों की जानकारी दी और कर्म, इरादे तथा आपसी निर्भरता जैसे सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की। स्पीकिंगक्यूब की संस्थापक और निदेशक प्रो. डॉ. दीपिका चमोली शाही ने मानसिक आघात के बोझ को कम करने के लिए विभिन्न मनोवैज्ञानिक तकनीकों पर अपने विचार रखे।

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