दुखद खबर : जिस घर में बेटे के जनेऊ की शहनाई गूंजनी थी, वहां पिता की चिता जल उठी

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बेरीनाग। बसंत पंचमी की सुबह जिस घर में बेटे के जनेऊ संस्कार की तैयारियों से खुशियाँ छलक रही थीं, उसी घर में रात होते-होते सन्नाटा पसर गया। हँसी, मंगल गीत और आशीर्वाद पल भर में विलाप में बदल गए।
विकास खंड बेरीनाग में तैनात ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सुरेश देउपा (45) अपने इकलौते बेटे श्रेयांस (11) का जनेऊ संस्कार कराकर बागेश्वर से लौट रहे थे। बेटे के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते हुए वे जिस भविष्य के सपने देख रहे थे, किसे पता था कि वही यात्रा उनकी अंतिम यात्रा बन जाएगी।

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कमेडी देवी के पास भारी बर्फबारी ने रास्ता रोक लिया। परिवार देर रात तक ठंड और अंधेरे में मार्ग खुलने की आस लगाए बैठा रहा। जब रास्ता नहीं खुला, तो दूसरे मार्ग से घर लौटने का फैसला लिया गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

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राईआगर के पास अचानक सुरेश देउपा के सीने में तेज दर्द उठा। बेटे के जनेऊ की खुशी आंखों में ही थी कि सांसें जवाब देने लगीं। परिजन उन्हें बदहवास हालत में सीएचसी बेरीनाग लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


जिस बेटे के जनेऊ के बाद पिता को गले लगाकर आशीर्वाद लेना था, वही बेटा अब पिता के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोता रहा। परिवार की खुशियाँ बर्फबारी के साथ जम गईं और जीवनभर न पिघलने वाला दर्द छोड़ गईं।

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मूल रूप से थल क्षेत्र के तुड़तूड़िया गांव निवासी सुरेश देउपा वर्तमान में बेरीनाग में रह रहे थे। सरल स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठ और मिलनसार अधिकारी के रूप में उनकी पहचान थी। उनके असामयिक निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

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