सीजफायर के बाद भी खाड़ी में तनाव -कई देशों में बजे सायरन, मिसाइल-ड्रोन हमलों का खतरा बरकरार

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम की घोषणा के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद खाड़ी देशों में अलर्ट सायरन बजने लगे, जिससे साफ है कि क्षेत्र में तनाव अब भी बरकरार है।


सीजफायर के बावजूद Kuwait, Saudi Arabia, United Arab Emirates और Qatar में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं। संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों के मद्देनज़र कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
इस बीच Israel की सेना ने दावा किया है कि Iran की ओर से मिसाइलें दागी गई हैं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं।

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कुवैत की सेना के अनुसार, उसका एयर डिफेंस सिस्टम लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम करने में जुटा है। वहीं Bahrain में सायरन बजाकर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। सऊदी अरब ने भी कई क्षेत्रों में चेतावनी जारी की है, जिससे लोगों में चिंता का माहौल है।


संयुक्त अरब अमीरात ने पुष्टि की है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हैं और संभावित हमलों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। कतर ने हालात को “उच्च स्तर का खतरा” बताते हुए नागरिकों को घरों में रहने की सलाह दी है। इससे स्पष्ट है कि जमीन पर स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।

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इस पूरे विवाद की मुख्य वजह Strait of Hormuz है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग माना जाता है। इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इजरायली मीडिया के मुताबिक, जब तक यह जलमार्ग पूरी तरह नहीं खुलता, तब तक ईरान की ओर से हमले जारी रहने की आशंका बनी हुई है।


ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और इजरायल अपने हमले रोकते हैं तो ईरान भी सैन्य कार्रवाई बंद कर सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम को स्वीकार करते हुए बातचीत शुरू करने की तैयारी जताई है।

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संभावित वार्ता Islamabad में हो सकती है।
हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत का मतलब युद्ध का अंत नहीं है। जब तक सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का आर्थिक प्रभाव भी एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से अमेरिका ने फिलहाल नरम रुख अपनाया है।


विशेषज्ञों के अनुसार, सीजफायर को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है और इस दौरान छिटपुट हमले जारी रह सकते हैं, खासकर Israel और Lebanon के बीच। हालांकि अमेरिका के दबाव के चलते हालात कुछ हद तक नियंत्रण में आ सकते हैं, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

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