भवाली हत्याकांड में तीन दोषी : अदालत का सख्त फैसला, आजीवन कारावास और जुर्माना

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नैनीताल। दिसंबर 2021 में भवाली क्षेत्र में हुए चर्चित नवीन चन्द्र आर्या हत्याकांड में अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सेशन जज कुलदीप शर्मा की अदालत ने मामले के तीनों मुख्य अभियुक्तों—मोहित कुमार आर्या, आकाश सिंह और नीलेश कुमार आर्या—को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में तीन माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।


अभियोजन पक्ष के अनुसार यह वारदात 20-21 दिसंबर 2021 की रात तिरछाखेत मार्ग पर नैनीबैण्ड के पास हुई थी। मृतक के भाई राजेन्द्र प्रसाद ने थाना भवाली में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आपसी रंजिश के चलते मोहित और उसके साथियों पर संदेह जताया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को 21 दिसंबर 2021 को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद से वे जेल में बंद थे।

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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) राम सिंह रौतेला ने मजबूत पैरवी की और अदालत में 13 गवाह पेश किए। इनमें सबसे अहम गवाही मोहित के सगे संबंधी राहुल आर्या की रही। राहुल ने अदालत को बताया कि घटना की रात करीब डेढ़ बजे तीनों आरोपी उसके घर पहुंचे थे और उनके कपड़ों व जूतों पर खून के निशान थे। राहुल के मुताबिक, आरोपी आकाश ने उसे अपने मोबाइल पर एक वीडियो भी दिखाया था, जिसमें तीन लोग एक व्यक्ति को बेरहमी से पीटते नजर आ रहे थे।

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विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट ने भी अभियोजन के पक्ष को मजबूत किया। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि आरोपियों के कपड़ों पर लगा खून वही था, जो घटनास्थल से बरामद मिट्टी में पाया गया था।


हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस द्वारा की गई बरामदगी प्रक्रिया में कुछ विसंगतियां भी चिन्हित कीं। अभियोजन ने दावा किया था कि आरोपियों की निशानदेही पर मृतक का पर्स बरामद हुआ, लेकिन अदालत ने पाया कि वह पर्स पहले ही शव के पंचनामे में दर्ज किया जा चुका था। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत ऐसी बरामदगी को मान्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि वस्तु के संबंध में सूचना बरामदगी से पहले दर्ज नहीं थी।

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इसके बावजूद अदालत ने राहुल आर्या की विश्वसनीय गवाही, घटना के तुरंत बाद आरोपियों का संदिग्ध आचरण और एफएसएल रिपोर्ट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों को निर्णायक मानते हुए निष्कर्ष निकाला कि तीनों आरोपियों ने सामान्य आशय के साथ नवीन चन्द्र आर्या की हत्या की। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत तीनों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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