UKNews-सड़क हादसों में घायलों को मिलेगा 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज -राह-वीरों को 25 हजार का पुरस्कार
देहरादून। सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने तथा घायलों की मदद के लिए आम नागरिकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से देहरादून में एक दिवसीय विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। सर्वे चौक स्थित अनुसंधान विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित संगोष्ठी में प्रधानमंत्री राहत योजना और नेक राहगीर (राह-वीर) योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री खजान दास और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने दीप प्रज्वलित कर किया। संगोष्ठी में पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया।
घायलों की मदद के लिए आगे आएं लोग
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए प्रत्येक व्यक्ति का जागरूक और संवेदनशील होना आवश्यक है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाना और प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराना किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राहत एवं राह-वीर योजना की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि जरूरत के समय लोग बिना किसी भय या संकोच के घायलों की सहायता के लिए आगे आ सकें।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति किसी परिवार की उम्मीदों और जिम्मेदारियों का आधार होता है। दुर्घटना के बाद परिवार को जिस पीड़ा और संकट से गुजरना पड़ता है, उसे समझते हुए प्रत्येक व्यक्ति को मानवीय संवेदना के साथ मदद के लिए आगे आना चाहिए। घायल को समय पर उपचार उपलब्ध कराना सच्ची मानव सेवा है।
उन्होंने ई-डीएआर और टीएमएस पोर्टल पर प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा संबंधित सुविधाओं का अधिकाधिक अस्पतालों में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
घायलों के इलाज पर 1.50 लाख रुपये तक की सुविधा
संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताया कि प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक परेशानी के कारण उपचार से वंचित होने से बचाना और उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा दिलाना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर यानी शुरुआती महत्वपूर्ण समय में घायल को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में मदद करने वाले राह-वीर को 25 हजार रुपये तक की पुरस्कार राशि देने का प्रावधान है। इसके अलावा वर्षभर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चयनित राह-वीरों को राष्ट्रीय स्तर पर एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है।
इन योजनाओं का उद्देश्य आम नागरिकों को सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की सहायता के लिए प्रोत्साहित करना है। आपातकालीन नंबर 112, पुलिस के ई-डीएआर और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के टीएमएस 2.0 प्लेटफॉर्म के माध्यम से संबंधित प्रक्रियाओं को संचालित किया जाता है।
हर घंटे औसतन 21 लोगों की सड़क हादसों में मौत
संगोष्ठी में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, देश में प्रतिवर्ष लगभग 5.13 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें करीब 1.83 लाख लोगों की मौत हो जाती है, जबकि लगभग 4.6 लाख लोग घायल होते हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, औसतन हर घंटे करीब 21 लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं। दुर्घटनाओं में 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की हिस्सेदारी भी चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने के लिए त्वरित उपचार, प्रभावी राहत एवं बचाव व्यवस्था और जनसहभागिता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में व्यक्ति और संस्थाएं भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। सामाजिक हित में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए निर्धारित प्रावधानों के तहत पुरस्कार एवं प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था है।
इस अवसर पर महानिदेशक परिवहन अनिल गर्व्याल, निदेशक शिक्षा खड़क सिंह दत्ताल, संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा, अपर जिलाधिकारी स्मृता परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार शर्मा, जिला संभागीय परिवहन अधिकारी अनिता चमोला सहित सरकारी एवं निजी अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सक और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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