उत्तराखंड…अब फ्री राशन सिस्टम में बड़ा बदलाव -फर्जी राशन कार्डों पर चलेगा सरकार का ‘डिजिटल हथौड़ा’

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को पूरी तरह हाईटेक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (सीसीईए) ने ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत अब फर्जी राशन कार्ड, डुप्लीकेट लाभार्थी और राशन घोटालों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है।

सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब 25,530 करोड़ रुपये खर्च करेगी। नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि राशन वितरण में होने वाली गड़बड़ियों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

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प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सरकार हर जरूरतमंद तक समय पर खाद्यान्न पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी उद्देश्य से पीडीएस व्यवस्था को ज्यादा आधुनिक, प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

फर्जी राशन कार्डों की अब खैर नहीं

नई व्यवस्था के तहत राशन कार्डों का डिजिटल सत्यापन, आधार सीडिंग और एआई आधारित डेटा एनालिसिस के जरिए ऐसे कार्ड चिन्हित किए जाएंगे जो फर्जी, डुप्लीकेट या अपात्र पाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे करोड़ों रुपये की लीकेज रुकेगी और वास्तविक गरीबों तक राशन सही तरीके से पहुंचेगा।

पूरे सिस्टम पर रहेगी रियल टाइम नजर

सरकार राज्यों में स्टेट कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करेगी, जहां से राशन की ढुलाई, वितरण और स्टॉक की लाइव मॉनिटरिंग होगी। शिकायतों के समाधान के लिए एआई आधारित सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं की समस्याओं का तेजी से निपटारा हो सकेगा।

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दो बड़ी योजनाओं को मिलाकर बना ‘सार्थक-पीडीएस’

सरकार ने ‘राज्यों के भीतर खाद्यान्न परिवहन और एफपीएस डीलर मार्जिन सहायता योजना’ तथा ‘स्मार्ट पीडीएस योजना’ को मिलाकर ‘सार्थक-पीडीएस’ का नया ढांचा तैयार किया है। इसका मकसद सिर्फ राशन बांटना नहीं बल्कि पूरे सिस्टम को तकनीक आधारित और नागरिक केंद्रित बनाना है।

81 करोड़ लोगों को मिलेगा फायदा

यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत आने वाले करीब 81.35 करोड़ लाभार्थियों को बेहतर और पारदर्शी तरीके से खाद्यान्न उपलब्ध कराने में मदद करेगी। योजना 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी।

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पहले ही शुरू हो चुके हैं बड़े डिजिटल सुधार

सरकार पहले ही राशन कार्ड डिजिटलीकरण, ई-पीओएस मशीनों, ऑनलाइन राशन आवंटन और कंप्यूटरीकृत सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसी व्यवस्थाएं पूरे देश में लागू कर चुकी है। ‘मेरा राशन’, ‘अन्न मित्र’ और ‘अन्न सहायता’ जैसे मोबाइल प्लेटफॉर्म भी पीडीएस सिस्टम को डिजिटल बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

अब सरकार का फोकस साफ है — “फर्जी लाभार्थियों को बाहर करो, असली जरूरतमंद तक राशन पहुंचाओ।”

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