राजस्व सेवाओं में डिजिटल क्रांति: भूमि कार्य, कृषि ऋण और वसूली प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन
देहरादून। राज्य में राजस्व विभाग की सेवाओं को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब कार्य की अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके साथ ही किसानों को बैंक से अपनी भूमि के सापेक्ष कृषि एवं कृषि से संबंधित गतिविधियों हेतु ऋण लेने की प्रक्रिया भी पूरी तरह डिजिटल बना दी गई है।
अब किसान या भूमि स्वामी पोर्टल के माध्यम से सीधे ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगे। ऋण की अदायगी पूरी होने के बाद जैसे ही बैंक द्वारा एनओसी जारी की जाएगी, भूमि पर दर्ज चार्ज स्वतः ही रिमूव हो जाएगा। इससे किसानों को बैंक और राजस्व कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
वहीं, ई-वसूली पोर्टल के माध्यम से राजस्व वसूली की प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। अब बैंक अथवा संबंधित विभाग अपने बकायेदारों के वसूली प्रकरणों को ऑनलाइन माध्यम से कलेक्टर को भेज सकेंगे। इस व्यवस्था में वसूली प्रक्रिया के हर स्तर पर रीयल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
इसके अतिरिक्त भू-नक्शा पोर्टल के अंतर्गत भूमि मानचित्र (कैडस्ट्रल मैप) को सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे आम नागरिकों को भूमि से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त हो सकेगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव राजस्व एस.एन. पांडेय, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरु, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव, स्टाफ ऑफिसर सोनिया पंत, एनआईसी के वरिष्ठ निदेशक (आईटी) मनीष वालिया, नरेंद्र सिंह नेगी, संयुक्त निदेशक (आईटी) चंदन भाकुनी सहित राज्य के सभी जिला मुख्यालयों से जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त तथा विभिन्न तहसीलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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