पत्नी के भरण-पोषण में जारी ₹5.69 लाख का वसूली वारंट हाईकोर्ट ने किया रद्द -मामले में निचली अदालत को पुनः सुनवाई के निर्देश

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पत्नी के भरण-पोषण के लिए पति के खिलाफ जारी ₹5.69 लाख के वसूली वारंट को रद्द कर दिया है। यह वारंट न्यायिक मजिस्ट्रेट, देहरादून की अदालत द्वारा जारी किया गया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ में हुई।


देहरादून निवासी संजीव अग्रवाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही मजिस्ट्रेट को भरण-पोषण के आदेशों को लागू करने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग न्यायिक विवेक, उचित गणना और दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही किया जाना चाहिए।

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मामला पति-पत्नी के बीच घरेलू हिंसा से जुड़ा है। निचली अदालत ने अगस्त 2019 में पत्नी पारुल अग्रवाल के पक्ष में ₹25,000 प्रति माह का अंतरिम भरण-पोषण तय किया था, जिसे बाद में अपील में बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह कर दिया गया। बकाया राशि के भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बना रहा।

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इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 1 फरवरी 2024 को ₹5.69 लाख से अधिक की राशि की वसूली के लिए पति के खिलाफ वारंट जारी कर दिया था। याची का कहना था कि उन्हें निचली अदालत में अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और एकतरफा निर्णय लिया गया।

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हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया को अनुचित मानते हुए वसूली वारंट को रद्द कर दिया और निचली अदालत को निर्देश दिए कि वह दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले की पुनः सुनवाई करे।

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