बनभूलपुरा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त : रेलवे जमीन खाली करो, अतिक्रमण हटेगा -पात्र परिवारों को विस्थापन के बाद छह महीने तक हर माह 2,000 रुपये की मिलेगी सहायता
नई दिल्ली/हल्द्वानी, 24 फरवरी।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण को लेकर Supreme Court of India ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि रेलवे की जमीन खाली करानी होगी। कोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जा सकता और रेलवे को अपने उपयोग का पूरा अधिकार है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अतिक्रमण करने वाले यह नहीं तय कर सकते कि वे उसी स्थान पर रहेंगे या रेलवे जमीन का उपयोग कैसे करेगा।
मामले में सामने आया कि बनभूलपुरा, गफूर बस्ती समेत आसपास के क्षेत्रों में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जे हैं, जहां 5,000 से अधिक परिवार (करीब 50 हजार लोग) रह रहे हैं। रेलवे ने कोर्ट को बताया कि ट्रैक विस्तार और अन्य परियोजनाओं के लिए इस जमीन की जरूरत है और यह क्षेत्र विस्तार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने कहा कि हजारों लोग दशकों से यहां रह रहे हैं और कई के पास पट्टे भी हैं। उन्होंने वैकल्पिक जमीन का सुझाव देते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर पुनर्वास आसान नहीं है।
केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि पात्र परिवारों को विस्थापन के बाद छह महीने तक हर माह 2,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। साथ ही राज्य सरकार और रेलवे मिलकर पुनर्वास की व्यवस्था करेंगे।
कोर्ट ने निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लोगों को Pradhan Mantri Awas Yojana के तहत आवेदन कराने में मदद दी जाए। इसके लिए 19 मार्च से एक सप्ताह का विशेष कैंप लगाया जाएगा और बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अप्रैल 2026 तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में तय की गई है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह आदेश उत्तराखंड के अन्य अतिक्रमण मामलों पर लागू नहीं होगा, लेकिन बनभूलपुरा में अवैध कब्जा हटाना जरूरी है।
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