उत्तराखंड को मिले 61 प्रशिक्षित फॉरेस्ट गार्ड -वन एवं वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी मजबूती
हल्द्वानी। उत्तराखंड में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सशक्त बनाने के लिए मंगलवार को राज्य को 61 प्रशिक्षित वन आरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) मिले। यह अवसर उत्तराखण्ड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (एफटीआई) में आयोजित वन आरक्षी वर्ष 2025 प्रशिक्षण सत्र (द्वितीय) के दीक्षांत समारोह का था, जहां छह माह का कठोर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
प्रशिक्षण सत्र में शामिल 61 वन आरक्षियों में पांच बीटेक पास, सात सेना से सेवानिवृत्त जवान तथा 15 बीएससी व एमएससी उत्तीर्ण युवा शामिल रहे। परिणामों की बात करें तो 13 प्रशिक्षु ससम्मान, 47 प्रथम श्रेणी तथा एक प्रशिक्षु द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ।
उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी के पंकज मेहरा को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक, लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार के जसवीर सिंह रजवार को रजत पदक तथा नैनीताल वन प्रभाग के गौरव डांगी को कांस्य पदक प्रदान किया गया।
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं प्रबंधन) डॉ. विवेक पाण्डेय ने कहा कि वन आरक्षी वन विभाग की रीढ़ होते हैं। बदलती चुनौतियों के दौर में तकनीकी दक्षता, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ कार्य करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वन और वन्यजीवों को सही मायनों में समझने के लिए बाइक छोड़कर पैदल गश्त करनी होगी।
समारोह के अंत में सभी प्रशिक्षुओं ने राष्ट्र, वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति निष्ठा की शपथ ली। इस अवसर पर एफटीआई निदेशक एवं मुख्य वन संरक्षक डॉ. तेजस्विनी अरविन्द पाटिल, उप वन संरक्षक डॉ. अभिलाषा सिंह, उप निदेशक आशीर्वाद कटियार तथा सेवानिवृत्त डीएफओ बलवंत सिंह शाही सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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